DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नागरिक प्रतिरोधों पर कार्यपालिका का शक्ित प्रयोग गलत

नागरिक प्रतिरोधों पर कार्यपालिका द्वारा शक्ित का इस्तेमाल काफी गलत है। इससे उनके मौलिक अधिकारों का हनन होता है। इस पर रोक लगाने के लिए अगर संविधान में संशोधन करने की जरूरत है तो इस पर भी सभी दलों को विचार करना चाहिए। महाधिवक्ता पीके शाही ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के 60 साल के बाद भी नागरिक प्रतिरोधों पर कार्यपालिका द्वारा ताकत का घातक इस्तेमाल हमारे कानूनों पर साम्राज्यवादी प्रभाव को दर्शाता है। इससे उबर कर हमें एक बेहतर व्यवस्था तैयार करनी होगी।ड्ढr ड्ढr श्री शाही चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में ‘नागरिक अवज्ञा व प्रतिरोध के दौरान कार्यपालिका द्वारा ताकत का घातक इस्तेमाल : पारदर्शिता व जवाबदेही’ विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर अल्टरनेटिव लॉ फोरम, बेंगलुरू के अरविंद नारायण ने कहा कि स्वतंत्रता के पहले भी नागरिक प्रतिरोधों पर कार्यपालिका द्वारा ताकत का इस्तेमाल होता था। आज भी स्थिति बरकरार है। प्रो. उपेंद्र बख्शी ने कहा कि इस मसले पर समेकित रूप से विचार कर सार्थक पहल करने की जरूरत है। पीयूसीएल के प्रो. विनय कंठ ने कहा कि नागरिकों को किसी भी स्थिति में अपनी बात रखने और सशक्त रूप से रखने का तो अधिकार मिलना ही चाहिए। कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. लक्ष्मीनाथ ने इस विषय पर सार्थक बहस की जरूरत बतायी। कार्यक्रम में एक्शन एड के राष्ट्रीय निदेशक बाबू मैथ्यू ने भी अपने विचार रखे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: नागरिक प्रतिरोधों पर कार्यपालिका का शक्ित प्रयोग गलत