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महंगाई पर घिरी सरकार

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आवश्यक वस्तुआें की कीमतों में रिकार्ड तोड़ बढ़ोतरी के लिए केन्द्र की यूपीए सरकार के खिलाफ देशभर में जबरदस्त आंदोलन की घोषणा कर दी। यहां पार्टी महाधिवेशन में आरोप लगाया गया कि कृषि उपजों के वायदा कारोबार के बारे में पिछली एनडीए सरकार की नीतियों को पलटा नहीं गया, बल्कि उसी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए सट्टा बाजार को संरक्षण दिया गया।ड्ढr ड्ढr माकपा इस बात से खासी नाराज है कि महंगाई काबू करने के उसके हर सुझावों को केन्द्र ने अनसुना किया। माकपा पार्टी कांग्रेस ने आम उपभोक्ता वस्तुआें के दामों को काबू में रख पाने की सरकार की विफलता के खिलाफ 15 अप्रैल से देशव्यापी आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक बढ़े हुए सभी दाम पूरी तरह कम नहीं हो जाते। इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल वाममोर्चा के नेता बिमान बसु द्वारा पेश प्रस्ताव का त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने अनुमोदन के साथ ही कीमतों पर आक्रामक संघर्ष छेड़ने की रूपरेखा तैयार हो गई है। पश्चिम बंगाल, कंरल व त्रिपुरा के पार्टी डेगिगेट इस बात को खुलकर रख रहे हैं कि आगामी आम चुनाव में महंगाई का मुद्दा यूपीए सरकार को ले डूबेगा, क्योंकि नौकरी पेशा कर्मचारी मध्यमवर्ग व निम्न तबके में काफी असंतोष है। आगामी चुनाव में लोग इसका यूपीए को करारा जवाब देंगे।ड्ढr ड्ढr माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि महंगाई पर फौरन काबू पाने के 4 अहम सुझाव केन्द्र सरकार को दिए गए हैं। इनमें सस्ते गल्ले की सरकारी दूकानों से हर तबके को राशन सुलभ कराने, 25 कृषि उत्पादों पर वायदा कारोबार को पूरी तरह प्रतिबंधित करने, पेट्रोल व डीजल पर कस्टम व एक्साइज डय़ूटी में कटौती करने आेर जमाखोरों व कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांगें शामिल हैं। माकपा चाहती है कि आवश्यक उपभोक्ता कानून के प्रावधानों को कड़ा किया जाए, जिससे राज्य सरकारें जमाखोरी और चोरबाजारी करने वालों से सख्ती से निपट सके। पार्टी प्रस्ताव में कहा गया है कि यूपीए के राज में पेट्रोल व डीजल की कीमतें आठ बार बढ़ी हैं। इन बढ़ी कीमतों की आड़ में केन्द्र सरकार ने आयात कर खाते में 40 हजार करोड़ से ज्यादा मुनाफा बटोरा। येचुरी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जिस अनुपात में कीमतों में उछाल आया, उससे सरकार के टैक्स का अनुपात भी बढ़ा। जबकि इसका बोझ आम आदमी पर न पड़े, आयात कर व एक्साइज डय़ूटी में कटौती होनी चाहिए थी। ऐसी बात हमारी मानती तो इस कदर महंगाई में उछाल नहीं होता।ड्ढr राज्य सरकारों के साथ भदेभावड्ढr केन्द्र-राज्य संबंधों के मुद्दे पर भी माकपा ने यूपीए सरकार के प्रति आंखें तरेरी हैं। माकपा ने कहा है कि वित्तीय संसाधनों और राजस्व के बंटवारे में राज्य सरकारों के साथ भेदभाव हो रहा है। पार्टी नेता सीमाराम येचुरी ने कहा कि देश में नई आर्थिक नीतियां लागू करने के बाद राज्यों की राजस्व आमदनी सिकुड़ती चली गई जबकि अपने संसाधन उगाहने के लिए उसके पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं। कांग्रेस-भाजपा की नीतियां समानड्ढr माकपा की नजर में आर्थिक उदारीकरण और अमेरिका परस्त विदेश नीति के मसले पर भाजपा व कांग्रेस की नीतियों में कोई बुनियादी फर्क नहीं है। येचुरी ने कहा कि देश की राजनीति पर इन दोनों का वर्चस्व बना रहना आम जनता के हित में नहीं है। इसीलिए हमारी ठोस वैकल्पिक नीतियों के आधार पर तीसरा विकल्प खड़ा करने की आेर आगे बढ़ रहे हैं। सिर्फ चुनाव के लिए नहीं होगा तीसरा विकल्पड्ढr यह पूछे जाने पर कि क्या आगामी आम चुनाव के पहले तीसरा विक्लप तैयार हो जाएगा तो श्री येचुरी ने कहा कि तीसरा विकल्प तात्कालिक लाभ के लिए नहीं बल्कि दूरगामी लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए बनेगा। उनसे पूछा गया कि तीसरा विकल्प सत्ता में आया तो माकपा प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने को तैयार है? तो इस पर येचुरी ने कहा कि सवाल अतिशयोक्ितपूर्ण है। इस तरह का पुल पार करने की नौबत नहीं आई। जब कभी आएगी ऐसा पुल सामने तभी सोचा जाएगा कि क्या करना है। यूएनपीए की नीतियांड्ढr यह पूछे जाने पर कि यूएनपीए की कोई आर्थिक नीति नहीं है और आंध्र में जब चंद्रबाबू नायडू सत्ता में थे तो उन्होंने विश्व बैंक समर्थक नीतियां चलाई। राज्य में किसानों ने आत्महत्याएं कीं। तो इस पर येचुरी ने कहा कि हमारी पाटी्र ने टीडीपी के साथ कोई संबंध अभी नहीं बनाए हैं। हमने यूएनपीए के घटक दलों से आर्थिक नीतियों के मसले पर स्पष्टता की मांग की है। नंदीग्राम का उदारीकरण से ताल्लुक नहींड्ढr नंदीग्राम मसले पर पार्टी भले ही बचाव की मुद्रा में है लेकिन नंदीग्राम की असलियत पर एक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया है। आर्थिक उदाीकरण में बुराइयां हैं तो फिर नंदीग्राम क्यों हुआ? इस प्रश्न पर येचुरी ने कहा कि नंदीग्राम का उदारीकरण से कोई रिश्ता नहीं है। हमने विदेशी पूंजी निवेश का विरोध नहीं किया। बशर्ते वह हमारे देश में टेक्नोलॉजी को उन्नत बनाए, रोजगार विकसित करे और उत्पादनशीलता बढ़ाए। परमाणु करार पर आगे बढ़ी तो खतरे में पड़ेगी सरकारड्ढr भारत-अमेरिकी असैन्य परमाणु करार पर माकपा ने कहा है कि यदि सरकार आईएईए बोर्ड आफ गवर्नर में प्रवेश करती है तो इसका साफ मतलब होगा कि यूपीए सरकार खतरे में पड़ेगी। येचुरी ने कहा है कि हमने आईएईए में सिर्फ आरंभिक बार्ता की छूट दी थी। अगर सरकार ने आगे कदम बढ़ाया तो फिर अमेरिका के हाथ में पूरी डील चली जाएगी। भारत करार पर अपने हितों की रक्षा के लिए कुछ नहीं कर सकेगा।ड्ढr ड्ढr उपाय ढूंढने को कैबिनेट में आज मंथनड्ढr नई दिल्ली (ब्यूरोएजेंसियां)। केन्द्र सरकार को अब ‘महंगाई की परिभाषा’ समझ में आई। इस चिंता में घुल रही सरकार ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। बीते कई दिनों से सरकारी मशीनरी इस बारे में विचार मंथन कर रही थी कि महंगाई से कैसे निपटा जाए। खासकर खाने-पीने की वस्तुआें और धातुआें के दाम बढ़ने के बाद तो सरकार की इस आेर और चिंताएं बढ़ गईं। वैसे खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मूल्यों वाली कैबिनेट समिति सोमवार को जरूरी चीजों के बढ़ रहे दामों की समीक्षा करेगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके मंत्रालय की आेर से कोई विशेष प्रस्ताव नहीं तैयार किया गया है, लेकिन वर्तमान वस्तुस्थिति पर कमेटी जरूर विचार करेगी। सरकार ने कहा है कि महंगाई को काबू करने के लिए वह हर कदम उठाने को तैयार है। महंगाई की दर ने अनुमानों को झुठलाते हुए 15 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में 0.76 फीसदी की बढ़ोतरी से पिछले 14 माह के उच्चतम स्तर 6.68 फीसदी पर पहुंच गई।ड्ढr ड्ढr इससे स्टील, फल-सब्जियों, इलेक्िट्रसिटी, हल्के डीजल तेल, सरसों का तेल, आटा, खांडसारी, रवा, सूजी-मैदा और सोडा ऐश आदि के दाम बढ़ गए। महंगाई को काबू करने की प्रतिबद्धता जताते हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और वाणिय मंत्री कमलनाथ ने बताया कि सरकार ने गैर बासमती चावल के निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए इसके निर्यात मूल्य को 350 डॉलर बढ़ाकर एक हजार डॉलर प्रति टन कर दिया है। लोहा और सीमेंट पर दी जा रही निर्यात कर वापसी सुविधा को वापस ले लिया। सरकार ने खाद्य तेलों के निर्यात को पूरी तरह रोक देने के साथ ही पाम आयल, सरसों और सूरजमुखी के तेल पर आयात शुल्क में भारी कमी कर दी थी। दो अप्रैल को सोयाबीन तेल के आयात शुल्क पर विचार के लिए बैठक बुलाई गई है। वित्त मंत्री का कहना है कि महंगाई को काबू करने के लिए तेजी से बढ़ती आर्थिक विकास की दर कुछ हल्की करनी पड़ी तो वह भी उन्हें स्वीकार है। उन्होंने कहा कि इसे काबू करने के लिए सरकार के पास ब्याज दर सबसे प्रभावी हथियार है। कमलनाथ ने कहा कि सरकार आवश्यक जिंसों के दामों पर अंकुश लगाने के लिए इनकी आपूर्ति बढ़ाने के उपायों पर तेजी से कदम उठाएगी। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन ने कहा है कि कोई भी कदम उठाने से पहले सभी पहलुआें पर बारीकी से विचार किए जाने की जरूरत है।

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