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सातवीं पास के कायल साइंटिस्ट भी

मोती महतो। उम्र 68 वर्ष। पेशा खेती। शिक्षा सातवीं पास। निवास जाटा। विशिष्टता जैविक खेती में महारत। यह परिचय है प्रमंडल के सर्वश्रेष्ठ किसान के पुरस्कार से नवाजे गये मोती महतो का। उच्च शिक्षा प्राप्त किसान और कृषि वैज्ञानिक भी उनके हुनर के कायल हैं। उनका कहना है कि रासायनिक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ित समाप्त हो गयी है। भूमि को उर्वर बनाने के लिए वह जैविक खेती का पाठ किसानों को पढ़ा रहे हैं। उनके पास चार लाख केचुएं हैं। महतो जल संरक्षण और प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। उनके योगदान को देखते हुए जिला प्रशासन ने राज्यस्तर पर प्रथम किसान के पुरस्कार के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया है। मोती महतो के पास महज दो एकड़ जमीन है। वह साल भर में सिर्फ 50 मन ही अनाज उपजा पाते थे। बकौल मोती इससे परिवार का जीवनयापन करना भी मुश्किल था। पढ़ने की ललक ने उन्हें राह दिखायी। फुर्सत के वक्त वह खेत में ही कृषि से संबंधित पत्र-पत्रिका और किसान डायरी पढ़ते थे। स्वाध्याय ने रंग दिखाया और जैविक खेती के मास्टर हो गये। इसका प्रयोग उन्होंने उसी दो एकड़ भूमि पर शुरू कर दी। परिणाम सुखद निकला। अब परिवार के 14 सदस्यों की आवश्यकता से अधिक अन्न उपजता है और 50 हजार रुपये कमा भी लेते हैं। 1में तत्कालीन डीसी सत्यपथी ने उन्हंे पुरस्कृत किया था। उन्हें प्रशासन ने रांची, डेमोटाड़ (हजारीबाग) और नदिया (पश्चिम बंगाल) बतौर प्रगतिशील किसान के रूप में प्रशिक्षण के लिए भेजा। 26 जनवरी 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजरुन मुंडा ने उन्हें पलामू प्रमंडल का सर्वश्रेष्ठ किसान का पुरस्कार प्रदान किया। बिरसा कृषि विवि के स्थापना दिवस पर 26 जून को राज्यपाल सिब्ते रजी ने सब्जी उत्पादन के लिए उन्हें प्रथम किसान के पुरस्कार से नवाजा। उन्हांेने सेवा भारती नामक संस्था बनाकर गढ़वा जिला के किसानों को स्वावलंबी बनाने में जुटे हैं। वह पूरे झारखंड में इस क्रांति को फैलाना चाहते हैं।ड्ढr

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