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राजनीतिक दलों के नेताओं की किरकिरी

रांची नगर निगम चुनाव में राजधानी की जनता ने राजनीतिक गलियारों के प्रत्याशियों को पूरी तरह नकार दिया। विभिन्न राजनीतिक दलों के गिने-चुने प्रत्याशी ही चुन कर आये। वे भी ऐसे प्रत्याशी हैं, जिनकी समाज में पकड़ है, जबकि राजनीति में अच्छी पकड़ रखनेवाले कई नेता हाशिये पर चले गये। मेयर रमा खलखो (झारखंड जनाधिकार मंच), पार्षद विजय साहू (झाविमो), राजेश गुप्ता (कांग्रेस), जावेद अख्तर (झामुमो), संजीव विजयवर्गीय (भाजपा) सहित चंद राजनीतिज्ञ ही चुनाव में सफल हो सके। इस चुनाव ने कई राजनीतिक दिग्गजों की पोल खोल कर रख दी।ड्ढr चुनाव में धराशायी होनेवाले प्रमुख राजनेताओं में कांग्रेस के अरुण कुमार पांडेय, कांग्रेस के रांची महानगर अध्यक्ष विनय सिन्हा दीपू, झाविमो के प्रदेश युवा मोरचा के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद, शिव कुमार सिंह, मौलेश सिंह, उमर भाई, राजद के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह आजाद, राजद के महानगर अध्यक्ष अफरोज आलम, शफीक आलम, रांची जिला महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष जगरानी कुजूर (कांग्रेस), झाविमो की आश्रिता कुजूर, कांग्रेस के सोरेन राम, जदयू के आफताब जमील, भाजपा झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी चंद्र दीक्षित, भाजपा के वीरेंद्र साहू, सतीश सिन्हा, मो रब्बानी, झामुमो के प्रदेश सचिव सामुएल गुड़िया, झायुमो के महानगर अध्यक्ष पवन जेडिया, सुरेंद्र यादव और आजसू समर्थित प्रदीप शर्मा आदि के नाम इसमें शामिल हैं।ड्ढr इसके अलावा भाजपा के पूर्व विधायक गुलशन लाल अजमानी की पूरी कोशिश के बाद भी उनके भाई तिलक अजमानी डिप्टी मेयर पद के चुनाव में विफल रहे। पार्षद पद के राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को भी जनता ने नकार दिया। इनमें झामुमो के अंतु तिर्की, भाजपा की पूनम देवी सहित कई छोटे-बड़े नेता शामिल हैं।

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