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मूरख जग यह, कथा अनंता

आइए, अप्रैल फूल के बहाने उन सभी का पुण्य स्मरण करें, जिनकी कृपा से हम एक दिन अनजाने में, और बरस के शेष 364 रोज जानबूझ कर मूर्ख बनते हैं। विद्वान रहकर जीने वाले क्या खाक जीए! मूर्ख होने में ही जीवन की सच्ची सार्थकता है। मूखर्ों का रोल जरा पैसिव किस्म का होता है। इन्हें स्वयं कुछ भी नहीं करना पड़ता। दूसरे बनाते हैं। ये सिर्फ बनते हैं। ये बाजार में जाते हैं। जहां पर भी ‘सेल’ लिखा हुआ देखते हैं, वहीं पर ठहर लेते हैं। ये अखबार पढ़ते हैं, तो डिस्काउंट कूपन्स तलाशते हैं। ये न्यूज से ज्यादा विज्ञापन के रंगीन पृष्ठों पर मोहित होते हैं। फ्री गिफ्ट, एक्सचेंज ऑफर और हॉलीडे पैकेजेज को देखकर इनकी बांछें खिल जाया करती हैं। ये ब्रांडेड की तरफ भागते हैं। ये सदैव इस तलाश में रहते हैं कि एक पर एक फ्री किस सामान के साथ मिलेगा। इस जरा सी उपलब्धि के लिए हजारों रुपए खर्च कर देने में भी इन्हें संकोच नहीं होता, अपितु चिर आनंद हस्तगत होता है। सच, मूर्खता के परम मार्ग से आनंद की प्राप्ति का जो चरम सुख आता है, उसे हम जैसे मूर्ख भक्तगण गूंगे के मीठे फल के स्वाद की भांति अंदर ही अंदर महसूस करते रहते हैं। बयान नहीं कर पाते। दूसरों के सम्मुख बयान करने का कोई लाभ भी नहीं। मूखर्ों की महिमा न्यारी है। ये अपने आप को श्रेष्ठ विद्वान समझते हैं। यही इनकी सबसे बड़ी पहचान है। इन्हें लगता है कि इनका एक एसएमएस प्रभु की प्रार्थना से भी अधिक शक्ितशाली है। इसीलिए ये किसी वंदना या प्रिंस के बोरवेल में गिर जाने पर या कोई बड़ी दुर्घटना होने पर वहां पहुंच कर या दूर से ही राहत सहायता पहुंचाने में विश्वास नहीं रखते हैं। ये एसएमएस विधि से समाधान प्रस्तुत करते हैं। इनके कान पीड़ितों की पुकार नहीं सुनते। इनकी आंखें सिर्फ टीवी चैनलों के मनोरंजक कार्यक्रमों के साथ फुटेज देख पाती हैं। ये फटाफट अपना मोबाइल निकालते हैं। उसके मैसेज बॉक्स में जाते हैं। एबीसीडी जैसा कोई ऑप्शन टाइप करते हैं और सेंट का बटन दबा देते हैं। इनका काम खत्म। आगे का काम चैनल का। इन्होंने अपने 3 से 6 रुपयों का एसएमएस का योगदान कर दिया। सेवा समाप्त। इन स्वयंभू चतुरों को सभी तो फूल बनाते हैं। चेयर वाले, शेयर वाले, मॉल वाले, स्टाल वाले, लोन वाले, रिंगटोन वाले, सेल वाले, खेल वाले, रैली वाले, थली वाले, ज्ञापन वाले, विज्ञापन वाले। और मैं भी क्या कर रहा हूं? इतनी देर से ‘फूल’ ही तो बना रहा हूं!

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