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अदालतों में पसरा रहा सन्नाटा

ोर्ट फीस में बढ़ोत्तरी को लेकर सोमवार को पटना हाईकोर्ट सहित राज्य की तमाम अदालतों में न्यायिक काम पूरी तरह ठप रहा। वकीलों ने साफ तौर पर कहा है कि जबतक कोर्ट फीस में हुई बढ़ोत्तरी को वापस नहीं लिया जाएगा तबतक उनका आन्दोलन चलता रहेगा। हाईकोर्ट स्थित तीनों अधिवक्तता संघों की समन्वय समिति के संयोजक वरीय अधिवक्ता योगेशचन्द्र वर्मा ने बताया कि राज्य के सभी 122 वकील संघों सहित 80 हजार वकीलों ने न्यायिक कार्य को सोमवार कोपूरी तरह ठप रखा।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि वकीलों ने अपनी चट्टानी एकता दिखाते हुए पूरी तरह एकजुट होकर अपने को अदालती कायरे से अलग रखा। इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इस काले कानून को वापस नहीं लिया तो अनिश्चितकालीन बहिष्कार का निर्णय भी आगामी 2 अप्रैल को लिया जा सकता है। फिलहाल बुधवार तक लगातार तीन दिनों तक अदालतों में वकील काम नहीं करेंगे। श्री वर्मा ने कहा कि अब गेंद सरकार के पाले में है। अब यह उसपर निर्भर करता है कि वह राज्य की न्यायपालिका को फिर से पटरी पर लाना चाहती है या नहीं। उल्लेखनीय है कि गत 27 और 28 फरवरी को हाईकोर्ट के वकीलों ने अदालती काम से अपने को अलग रखा था। बाद में उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री सुशील कुमार मोदी ने वकीलों के शिष्टमंडल को दस दिनों में जरूरी सुधार का आश्वासन दिया था। लेकिन जब उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो समन्वय समिति ने बुधवार तक काम नहीं करने का फैसला लिया। साथ ही राज्य के तमाम वकीलों से भी ऐसा ही करने की अपील की गयी है। सरकार ने कहा-नहीं घटाएंगे कोर्ट फीड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। न्यायपालिका पर होने वाले खर्च में बढ़ोतरी की वजह से सरकार कोर्ट फी नहीं घटायेगी। सोमवार को शकील अहमद खान और गजेन्द्र प्रसाद सिंह की ध्यानाकर्षण सूचना के जवाब में उद्योग राज्यमंत्री गौतम सिंह ने कहा कि न्यायपालिका पर सालाना 1रोड़ रुपये खर्च हो रहा है जबकि कोर्ट फी में बढ़ोतरी पर भी मात्र 20 करोड़ रुपये हीमिलेंगे। दूसरी आेर विधान परिषद में सोमवार को कोर्ट फीस में वृद्धि किए जाने से हो रही परेशानी का भी मामला उठा। प्रश्नोत्तर काल के बाद नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि न्याय सस्ता और सुलभ होना चाहिए। कोर्ट फीस में वृद्धि से परेशानी हो रही है और सरकार को इसमें अविलंब कमी करनी चाहिए। मंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सालाना 25000 रुपये आय वालों पर दरों में वृद्धि का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके जवाब से नाराज राजद के सदस्यों (शकुनी चौधरी को छोड़कर) ने वाकआउट किया।ड्ढr ड्ढr न्यायालय फी (बिहार संशोधन) अधिनियम 2007 के जरिये दरों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए श्री खान ने कहा कि लोकहित याचिका की दर 1000 रुपये जबकि सामान्य याचिका की दर शुल्क 500 रुपये तय की गयी है। यह राज्य की गरीब जनता के साथ अन्याय है क्योंकि महाराष्ट्र में उक्त याचिकाओं की दर मात्र 20 रुपये है। इसी वजह से उच्च न्यायालय समेत राज्य की सभी अदालतों में वकीलों ने सोमवार से तीन दिनों की हड़ताल शुरू की है। उनके इतना कहते ही मंत्री ने जवाबी हमला बोला- अब पता नहीं वकील हड़ताल क्यों कर रहे हैं जबकि आधे-एक घंटे के लिए ही हजारों-लाखों रुपये लेते हैं। श्री खान ने उन्हें जाली स्टांप की बिक्री रोकने की सलाह दी। इस पर मंत्री ने कहा कि दरअसल शेट्टी कमीशन की सिफारिशों को पूरा करने की वजह से राजकोष पर बोझ बढ़ा है। उच्च न्यायालय ने भी दरों में बढ़ोतरी का निर्देश दिया था। मंत्री के जवाब से नाराज राजद के सदस्यों ने वाकआउट किया। हालांकि शकुनी चौधरी उसी समय अपनी ध्यानाकर्षण सूचना पढ़ते रहे। विधान परिषद में महाचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि कोर्ट फीस में वृद्धि के विरोध में राज्य के कई कोर्ट बंद हैं। सरकार को इसपर पुनर्विचार करना चाहिए। वहीं शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के चंदन बागची ने बिहार में अफीम की खेती की रोकथाम के लिए सरकार से कारगर कदम उठाने और सदन में वक्तव्य की मांग की।ं

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