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अचाह को पाने के लिए सच्चा इंसान बनना जरूरी

आखिरकार 40 वर्षो बाद 4 अप्रैल को देश में पाकिस्तानी फिल्म ‘खुदा के लिए’ रिलीज होने जा रही है। परसेप्ट पिक्चर कंपनी की इस फिल्म मेंी घटना के बाद की परिस्थितियों को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। वर्ष 1से पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब एक हिंदी फिल्म वहां दिखाने के बदले में एक उर्दू फिल्म भारत में दिखाने पर पाकिस्तान सरकार राजी हो गई है। इसी क्रम में भारत में ‘खुदा के लिए’ के बदले में पाकिस्तान में ‘तारे जमीन पर’ रिलीज की जा रही है। दोनों देशों की फिल्म इंडस्ट्री के बारे में अपनी राय देते हुए पाकिस्तानी निर्देशक शोएब मंसूर कहते हैं कि मैं भारतीय फिल्म उद्योग से असंतुष्ट हूं। अच्छा मुनाफा होने के बावजूद अक्सर यहां की फिल्में एक ही तार में बंधी नजर आती हैं। वर्ष 2005-06 में इस फिल्म की शूटिंग मात्र 45 दिनों में पूरी की गई। 2007 में गोवा के ‘अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल’ में दिखाने पर इसे खूब वाहवाही भी मिली। फिल्म लाहौर के दो संगीतकार भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती है। मंसूर (शान) अपनी आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाता है, जहां 11 सितंबर की घटना के बाद उसे आतंकवादी समझ लिया जाता है। दूसरी ओर छोटा भाई अपने दोस्त शेरशाह (हामिद शेख) के बहकावे में आकर संगीत छोड़ जिहाद की राह पर निकल पड़ता है। उधर मंसूर का चाचा (हुमायूं काजमी) बेटी मैरी (ईमान अली) को धोखे से बेटी को अफगानिस्तान के एक छोटे से गांव में लाकर उसका निकाह करा देता है। मैरी वहां से भागने की कोशिश करती है, मगर नाकाम होती है। फिल्म का वास्तविक संगीत रोहैल हयात, जावेद बशीर, शुजा हैदर, अहमद जहाांेब, खावर जावेद और लगान बंद द्वारा तैयार किया गया है। संजीदा विषय पर बनी फिल्म ‘खुदा के लिए’ सदियों से समाज में फैली कुरीतियों और आधुनिक व उदारवादी विचारों के बीच संघर्ष की दास्तान है। फिल्म का संदेश है, ‘‘अल्लाह को पाने के लिए कुर्ता-पायजामा पहनने, लंबी दाढ़ी व औरतों को पर्दे में रखने की नहीं, सिर्फ एक सच्चा इंसान बनने की जरूरत है।’’ जाने माने कलाकार नसीरूद्दीन शाह ने इस फिल्म में ‘मौलाना वली’ की महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। अपना रोल उन्हें इतना भाया कि इसके लिए उन्होंने पैसे नहीं लिए। पाकिस्तान, लंदन और दुबई में व्यावसायिक रूप से सफल होने के साथ इस फिल्म को 2007 के 31वें ‘केयरो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में ‘सिल्वर पिरामिड’, इटली में ‘रोबटरे रोसेलिनो’ और ‘मसकट फिल्म फेस्टिवल’ के दौरान ‘बेस्ट फॉरेन फिल्म’ अवार्ड भी मिल चुका है।ं

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