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रेलवे का डिस्प्ले बोर्ड थोड़ा छकाता, थोड़ा फंसाता

पटना जंक्शन के पूछ-ताछ काउंटर के पास लाखों रुपये खर्च करके लगाया गया डिस्प्ले बोर्ड यात्रियों को जानकारी कम व भ्रमित अधिक करता है। अगर डिस्प्ले बोर्ड पर पूर्ण विश्वास किया जाय तो ट्रेन छूटने की प्रबल संभावना बनी रहती है। सोमवार को इस तहर की दो घटनाएं प्रकाश में आयीं। सुबह 7.30 बजे तक डिस्प्ले बोर्ड पर विक्रमशिला एक्सप्रेस के आने का समय 6.45 लिखा हुआ था।ड्ढr ड्ढr कई यात्रियों को लगा कि विक्रमशिला तो चली गयी है, लेकिन उसी समय उद्घोषणा हुई कि विक्रमशिला एक घंटे लेट आ रही है। इसकी शिकायत कई यात्रियों ने स्टेशन प्रबंधक से की। प्रबंधक महोदय की पहल के बाद भी डिस्प्ले बोर्ड पर आ रही गलत जानकारी को दुरुस्त नहीं किया गया। अंतत: विक्रमशिला एक्सप्रेस आठ बजे पटना पहुंची। इसी प्रकार अपराह्न् तीन बजे डिस्प्ले बोर्ड पर लिखा था कि 5714 कटिहार इंटरसिटी एक्सप्रेस 2.15 बजे प्लेटफॉर्म नंबर तीन से खुलेगी। इस तरह के कारनामे प्रतिदिन देखने को मिलते हैं। यही नहीं प्लेटफॉमरे पर लगे कोच इंडिकेटर का भी यही हाल है। यह एस 7 को एस 5 व शयनयान को वातानुकूलित बोगी बताता है। इस संबंध में रेलवे के वाणिज्य व टेलीकॉम विभाग के कर्मी एक दूसरे पर दोष मढ़ते हैं। सिस्टम बनाने की जिम्मेदानी टेलीकॉम विभाग की है और इसका संचालन वााणज्य विभाग के द्वारा किया जाता है। ट्रेन के आने के समय में परिवर्तन होता है तो डिस्प्ले बोर्ड में इसे फीड नहीं किया जाता है। इसका खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ता है। दबी जुबान में कुछ रेलकर्मी इसे आउटसोर्सिग काा परिणाम भी मानते हैं।ं

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