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सिरिस्ता न हाजत, कैसे हो हिफाजत

राजेन्द्रनगर टर्मिनल रेल पुलिस (जीआरपी) थाने में सोमवार को अनहोनी की कालिख लग ही गई। हकीकत में यहां कभी भी कोई अप्रिय घटना या हादसा हो सकती है। कहने को थाना लेकिन बुनियादी संसाधन भी मयस्सर नहीं है। उस पर से पुलिसकर्मियों का रौब। अभी तो कैदी ने आग लगाने की कोशिश की है।ड्ढr ड्ढr आलम यह कि कभी कोई अपराधी हिरासत से भाग कर ट्रेन के नीचे भी जा सकता है। वहीं पुलिसकर्मियों के समक्ष थाने की सुरक्षा ही एक बड़ी चुनौती है। जीआरपी थाने की हैरतअंगेज स्थिति है। सिरिस्ता न हाजत। बैरक न मालखाना। न समुचित शौचालय और न चापाकल। कभी हुआ करता था बुकिंग काउंटर अब उसी भवन में चल रहा है थाना। एक ही कमरे के अंदर थानाध्यक्ष से मुंशी और सिपाहियों तक के बैठने, लिखने-पढ़ने, शस्त्र रखने, शौचालय, किचेन और अन्य कार्यो को अंजाम देने की विशशता। एक अदद वाहन भी नहीं थाने के पास। फिर कैसे विशेष परिस्थितियों में घायलों को अस्पताल, कैदियों को कोर्ट या जेल आदि जगहों पर पहुंचाया जाता है!ड्ढr ड्ढr स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। जीआरपी थानाध्यक्ष सुधाकरनाथ ने बताया कि थाने की स्थिति में सुधार के लिए कई बार दानापुर मंडल रेल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से लिखित तौर पर अनुरोध किया गया लेकिन अब तक नतीजा सिफर ही रहा। दूसरी तरफ रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की बल्ले-बल्ले है। टर्मिनल के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर आरपीएफ पोस्ट के प्रभारी का चैम्बर, मालखाना, बैरक व अन्य मिला कर तीन-चार कमरे हैं। इसके अलावा अन्य संसाधन उपलब्ध कराये गये हैं। एक तरफ जहां प्लेटफॉर्म पर आरपीएफ पोस्ट है वहीं जीआरपी थाना टर्मिनल के मुख्य पोर्टिको से जीआरपी थाने की दूरी करीब एक किलोमीटर है। नतीजतन पीड़ितों को मामला दर्ज कराने के लिए थाने तक पहुंचने में पसीना छूट जाता है।ं

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