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मिल्खा और रंधावा लेंगे मशाल दौड़ में भाग

बाईचुंग भूटिया का तिब्बत के पक्ष में कदम पूर्व एथलीट मिल्खा सिंह और जीएस रंधावा को प्रभावित नहीं कर सका। दोनों एथलीटों का मानना है कि खेल का मैदान राजनीतिक बयान के लिए सही मंच नहीं है। उन्हांेने १७ अप्रैल को होने वाली आेलंपिक मशाल दौड़ में भाग लेने का वादा किया। भारतीय फुटबाल कप्तान भूटिया ने कहा था कि तिब्बतियों से सहानुभूति के चलते राजधानी में आेलंपिक मशाल दौड़ में हिस्सा नहीं लेंगे। उल्लेखनीय है कि तिब्बती बीजिंग आेलंपिक खेलों का विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनके देश में चीन मानवाधिकारों का हनन कर रहा है। भूटिया ने कहा, ‘मुझे तिब्बती लोगों से सहानुभूति है। मैं हिंसा के खिलाफ हूं। लेकिन मुझे लगता है कि उनकी लड़ाई में मैं तिब्बती लोगों के साथ रहना चाहिए।’ मिल्खा सिंह और जीएस रंधावा के विचार भूटिया से अलग हैं। उनका कहना है कि खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए। फ्लाइंग सिख ने कहा, ‘क्यक्ितगत रूप से मेरा मानना है कि खेल और राजनीति को मिलाना नहीं चाहिए। मैं शर्तिया तौर पर मशाल दौड़ में भाग लूंगा।’ रंधावा ने कहा, ‘भूटिया ने वह किया जो उन्हें सही लगा। मशाल दौड़ में भाग लेना एक सम्मान है। उन्हें वह गंवाना नहीं चाहिए था।’ रंधावा ने कहा, ‘कौन क्या फैसला करता है यह पूरी तरह उसी पर निर्भर करता है। मेरा मानना है कि आेलंपिक खेल शांति और सदभावना का संदेश देता है। राजनीति को खेलों में मिलाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए।’ महान हर्डलर ने कहा, ‘मुझे भारतीय आेलंपिक संघ (आईआेए) से न्योता मिला है। यह मेरे लिए सम्मान और प्रतिष्ठा की बात है। मैं मशाल दौड़ में जरूर रहूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘अगर सरकार मशाल दौड़ की सुरक्षा लेगी और सभी इंतजाम करेगी तो कोई वजह नहीं है कि मैं इससे पीछे हटूं।’

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