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दूसरा चीन बनने पर नेपाल की हो रही है आलोचना

तिब्बती शरणार्थियों के प्रदर्शनों को लेकर ज्यादा ही कड़ाई बरतने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की आलोचना हो रही है। पुलिस ने मंगलवार को चीनी दूतावास के बाहर प्रदर्शन कर रहे 25तिब्बती प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इनमें 118 महिलाएं हैं। बाद में सभी रिहा कर दिए गए। नेपाल ने आलोचनाओं की परवाह न करते हुए चीन की तिब्बती नीति का समर्थन करते हुए कहा कि बीजिंग ओलंपिक में वह सर्वश्रेष्ठ एथलीटों का दल भेजेगा। गौरतलब है कि हाल की घटनाओं के बाद कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला से कहा है कि तिब्बती शरणार्थियों के साथ सख्ती बरत कर देश की छवि को धूमिल न करें। ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ और इंटरनेशनल राइट्स वाच नामक गैर सरकारी संगठनों ने नेपाल के प्रति विरोध दर्ज करवाया है। इन संगठनों के अनुसार शांति पूर्वक प्रदर्शन करने वाले तिब्बती शरणार्थियों के साथ नेपाल में र्दुव्‍यव्यवहार हो रहा है। दोनों संगठनों ने कोईराला को एक संयुक्त पत्र भेजा। पत्र में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर रोष व्यक्त किया गया है। संगठनों ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने कानूनी रूप से उचित कदम नहीं उठाया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की एशिया क्षेत्र की कार्यकारी निदेशक कैथरीन बेबर और एशिया एडवोकेसी की निदेशक सोफिया रिचर्डसन ने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ होने वाले व्यवहारों को लेकर संगठन चिंतित है। गौरतलब है कि 10 मार्च से विभिन्न देशों में तिब्बतियों द्वारा चीन की नीति के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं।

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