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कब्जे वाले मकानों का आवंटन क्यों किया!

‘पैसा ले लिया’ ‘बैनामा कर दिया’ तो फिर कब्जा क्यों नहीं दिया? मंगलवार को यह सवाल हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एलडीए से किया। अदालत ने वीसी से कहा है कि हलफनामा दायर कर यह भी बताए कि जब किसी जमीन या मकान पर अवैध कब्जा हो तो उसे हटाए बिना एलडीए आखिर ऐसे प्लाट और मकान का आवंटन और बैनामा आखिर क्यों कर देता है। अदालत ने जवाब तलब किया है कि क्यों न इस स्थिति के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाय और क्यों न भुक्तभोगी खरीदारों को एलडीए से मुआवजा दिलवाया जाए।ड्ढr न्यायमूर्ति प्रदीप कांत तथा न्यायमूर्ति एस एन शुक्ला की खण्डपीठ ने ऐशबाग रामनगर योजना के आवंटियों राजेन्द्र कुमार गुप्ता व अन्य की आेर से दायर याचिका मंे यह सवाल उठाए गए। आवंटियों का आरोप था कि उन्हें लाटरी के जरिये उक्त योजना मंे प्लाट आवंटित हुआ। एलडीए ने उनसे जमीन का पूरा पैसा, फ्री होल्ड तथा डेवलपमेंट चार्ज लेने के बाद 11 अगस्त से सितम्बर 2006 के बीच बैनामा लिख दिया। याचिकाकर्ताआें का आरोप था कि इसके बाद एलडीए ने न तो उन्हें मकान का कब्जा दिया और न ही डेवलपमेंट का कोई काम किया। सड़कें, सीवर लाइन, वाटर सप्लाई का कोई काम नहीं कराया। याचिका पर एडवोकेट सत्य प्रकाश की दलील थी कि वास्तव मंे उक्त योजना की जमीन पर अवैध कब्जेदारों का कब्जा है और उन्हें हटाये बिना ही एल डी ए ने आवंटन, बैनामा आदि की कार्यवाही करके उनसे पैसे ले लिए और अब आँखें फेर ली। जवाब मंे एलडीए के वकील ने भी माना उक्त योजना मंे 80 बैनामे किए गए। पीठ ने आदेश में टिप्पणी की है कि एलडीए को किसी को भी प्लांट देने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उस पर अवैध कब्जा न हो। पीठ ने याचिका पर 17 अप्रैल की तारीख निश्चित करते हुए एलडीए से दो हफ्ते मंे जवाब माँगा है।

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