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इंजीनियरों की पोस्टिंग-शंटिंग कराने लगे ठेकेदार

वक्र्स डिपार्टमेंटों में इंजीनियर सिंडिकेट, ठेकेदार गंठजोड़, अघोषित तौर पर ट्रांसफर टेंडर जैसे किस्से तो जगजाहिर हैं, लेकिन हाल में एक और खेल इससे जुड़ा है। पथ निर्माण विभाग में कुछ बड़ी कंपनियों और ठेकेदारों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। कुछ बड़ी कंपनियों और ठेकेदारों की सत्ता करीबी लोगों से खासी छनती है। इसे विभाग का एक- एक अफसर-इंजीनियर तक जानता है। अब तो इंजीनियरों की पोस्टिंग- शटिंग भी ठेकेदार कराने लगे हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती। जेइ- एइ को तो पल में इधर से उधर कराने की क्षमता भी रखते हैं। इसका सीधा असर काम और क्वालिटी पर दिखने लगा है। पूरे राज्य में करोड़ों की योजना पर काम चल रहा है, लेकिन काम की गति ठीक होती, तो 246 करोड़ सरेंडर होने की नौबत नहीं आती।ड्ढr समय सीमा पर काम नहीं होने का प्रमुख कारण भी यही है। विभाग में शीर्ष स्तर पर एक दागी इंजीनियर की पोस्टिंग डालटनगंज के एक ठेकेदार ने करायी, यह चर्चा पुरानी हो गयी है। एनएच में भी बड़े पैमाने पर इंजीनियर इधर से उधर किये गये थे। कम- से- कम आधा दर्जन इंजीनियरों की पोस्टिंग में ठेकेदारों ने हाथ बंटाये हैं। इसमें इनजीनियरों को कुछ लगाना नहीं होता है। ठेकेदार ही मनचाही पोस्टिंग कराते हैं। इसके बाद अपनी शत्त्रो के तहत इंजीनियरों को नकेल में रखते हैं।ड्ढr राजधानी की कई सड़कों पर करोड़ों का काम चल रहा है। इंजीनियर जब नियम- कानून से काम करने की सख्ती दिखाते हैं, तो उन्हें 24- 48 घंटे में पाकुड़, साहेबंगज पहुंचा देने की धमकी दी जाती है।ड्ढr नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ जेइ- एइ ने बताया कि ऊपर के इंजीनियरों ने ठेकेदारों के साथ सौदा कर लिया है। लिहाजा कहीं कायदे से मॉनिटेरिंग नहीं होती। रांची में पदस्थापित कई इंजीनियरों की सरकार तक सीधी पहुंच हैं। करोड़ों के काम में कहीं भी क्वालिटी और स्पीड नहीं। फिर भी इंजीनियरों का कुछ नहीं बिगड़ता है।ं

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