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दलाई लामा पर सरकार की टेढ़ी नजर

भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने दलाई लामा को संकेत दिया है कि वे भारत में ऐसी राजनीतिक गतिविधियां न करें जिससे भारत-चीन रिश्तों पर बुरा असर पड़े। उन्होंने एक टेलीविजन चैनल पर तिब्बतियों के धर्म-गुरु और शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता दलाई लामा के बारे में यह भी कहा कि वे हमारे सम्मानित अतिथि हैं। भारत उनकी मेहमाननवाजी जारी रखेगा। लेकिन जब तक वे भारत में हैं, वे ऐसा कोई राजनीतिक काम न करें जिससे चीन से रिश्ते खराब हों। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन ने चीन के वरिष्ठ नेता ताई बिंगुओ को आश्वासन दिया है कि भारत में ओलंपिक मशाल की पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस बीच अभिनेता आमिर खान ने तिब्बती संगठनों की इस अपील को ठुकरा दिया है कि वे ओलंपिक खेलों की मशाल रैली में भाग न लें। इससे पहले भारतीय फुटबाल कैप्टन बैचुंग भूटिया ने ओलिंपक मशाल को थामने से इंकार कर दिया था। आमिर खान ने कहा कि जहां तक तिब्बत की आजादी का सवाल है, मैं उनके साथ हूं। पर ओलंपिक खेल विश्व की महान विरासत है, उसे इसी रूप में देखा जाना चाहिए। इस मसले पर चीन भारत के ऊपर काफी दबाव बनाये हुए है। भारत के लिए राहत की बात यह कि दलाई लामा अगले हफ्ते भारत से अमेरिका चले जाने वाले हैं। रास्ते में वे जापान में भी रुकेंगे। स्मरणीय है कि चीनी दूतावास में तिब्बतियों के घुस जाने पर भारत सरकार की किरकिरी हुई थी। इस बीच अनेक विपक्षी दलों ने सरकार की तिब्बत नीति की भर्त्सना की है। राजग संयोजक जार्ज फर्नाडीज ने तो चीन को एक बार फिर खतरा नंबर एक करार देते हुए सरकार की नीति को चीन के सामने घुटना टेक करार दिया है। भारतीय जनता पार्टी भी इसी किस्म की राय व्यक्त कर चुकी है। इस बीच चीन ने आरोप लगाया है कि तिब्बती की आजादी की समर्थक ताकतें अब आत्मघाती हमले भी कर सकती हैं। दलाई लामा ने आशंका जताई थी कि तिब्बतियों के नाम पर की जारी हिंसा में संभवत: चीन का ही हाथ था।ं

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