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अमिताभ की जमीन मामले में शीर्ष स्तर से कोई हस्तक्षेप नहीं

राज्य सरकार ने कहा है कि अमिताभ बच्चन को बाराबंकी की जमीन के मामले में जारी नोटिस सामान्य न्यायिक प्रक्रिया है और इसमें प्रदेश सरकार के शीर्ष स्तर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।ड्ढr मंगलवार को जारी किए गए एक सरकारी बयान में कहा गया है कि इस मामले में कुछ लोग तथ्यों को तोड़-मरोड़कर और आधारहीन बयानबाजी करके मुख्यमंत्री और वर्तमान सरकार को बदनाम कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। सच तो यह है कि यह जिला स्तर पर की जाने वाली सामान्य कार्यवाही है, जिसमें मुख्यमंत्री के स्तर पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही किए जाने का कोई सवाल नहीं उठता।ड्ढr इतना छोटा मामला तो शासन व प्रशासन के शीर्ष स्तर के संज्ञान में भी नहीं था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्री बच्चन के पक्ष में दिए गए निर्णय से भी इसका कोई सम्बन्ध नहीं है। किसी भी जमीन का बैनामा किए जाने के बाद राजस्व अधिकारी और सब रजिस्ट्रार द्वारा सामान्यतया उसकी जाँच की जाती है। जाँच में यदि कोई विसंगति सामने आती है तो इसके लिए सम्बन्धित पक्ष को नोटिस जारी की जाती है।ड्ढr जिलाधिकारी बाराबंकी की रिपोर्ट के अनुसार श्री बच्चन के पक्ष में बाराबंकी में 13 जुलाई 2007 को बैनामा किया गया था, उसमें फतेहपुर के तहसीलदार द्वारा 10 जनवरी 2008 को जो रिपोर्ट पेश की गई है उसी के आधार पर कार्यवाही की जा रही है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इस भूमि पर पीपल का एक पुराना पेड़ और खजूर के लगभग 155 पेड़ भी हैं लेकिन इन पेड़ों के बारे में विलेख पत्र में कोई जिक्र नहीं है।ड्ढr इस रिपोर्ट के आधार पर बाराबंकी के अपर जिलाधिकारी कलेक्टर स्टाम्प न्यायालय द्वारा इस मामले में गत 7 मार्च को भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा-47 ए33 की तहत वाद दर्ज किए जाने का आदेश पारित किया गया था और उसी दिन उक्त न्यायालय द्वारा श्री बच्चन को नोटिस जारी करते हुए 31 मार्च की तारीख निर्धारित की गई थी। निर्धारित तारीख को श्री बच्चन की ओर से विनय कुमार शुक्ला न्यायालय में उपस्थित हुए। न्यायालय द्वारा नोटिस का उत्तर देने के लिए पाँच मई 2008 की तारीख निर्धारित की गई है।

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