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उत्पादन ठप होने का खतरा, पनबिजली परियोजना की हालत बिगड़ी

जल संसाधन विभाग द्वारा नहरों को बंद करने से राज्य की आधी दर्जन पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन ठप होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। उधर लगातार गहराते बिजली संकट को देखते हुए बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्िट्रक पावर कारपोरेशन (बीएचपीसी) ने जल संसाधन विभाग से अपने नहरों को पूर्णत: बंद नहीं करने का अनुरोध किया है। उसने कहा है कि नहरों को अगर आंशिक रूप से ही बंद किया जाए तो राज्य की पनबिजली परियोजनाओं से कम से कम 15 मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।ड्ढr ड्ढr इससे राज्य के कई हिस्सों को बिजली संकट से भारी राहत मिल सकती है। विभाग ने कोसी नहर को समय से पहले ही बंद कर दिया है जबकि सोन नहर इसी महीने के पहले सप्ताह में बंद हो जाएगी। बीएचपीसी के प्रबंध निदेशक एल.पी. सिन्हा ने जल संसाधन विभाग के सचिव अजय वी. नायक से अनुरोध किया है अगर सीमित मात्रा में पानी की आपूर्ति हो तो पनबिजली परियोजनाओं की एक-एक यूनिट से बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। उनके अनुसार सोन पश्चिमी नहर से डेहरी, ढेलाबाग और नासरीगंज बिजलीघर सम्बद्ध हैं। यहां एक-एक यूनिट चलाकर 3 मेगावाट बिजली उत्पादित हो सकती है। इसी तरह सोन पूर्वी नहर से 4000 की जगह 2000क्यूसेक पानी दी जाए तो बारुण और अगनूर पनबिजलीघर से 2 मेगावाट बिजली मिल जाएग़ी। पूर्वी गंडक से 10500 की जगह 3500क्यूसेक पानी मिले तो वाल्मीकिनगर पनबिजली घर से 5 मेगावाट बिजली उत्पादित हो सकती है। इसी तरह कोसी से 1500 की जगह 3500क्यूसेक जलस्रव हो तो कटैया से भी 5 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकता है।

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