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23 फरवरी, 2020|7:21|IST

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सरकारी कोशिशों के बावजूद थोक बाजार में दाम बढ़े

महँगाई रोकने के जो कदम सरकार ने सोमवार को उठाए थे, उनका असर मंगलवार को वायदा कारोबार पर दिखा। इससे खाद्य तेलों और तिलहन के दाम कुछ घटे जरूर लेकिन इनका कारोबार भी रोक दिया गया। उधर, सरकार ने यह भरोसा भी दिलाया कि स्टील के दामों में महीने भर के अंदर 10 से 20 फीसदी की कटौती हो जाएगी। हालाँकि उठा-पटक के बीच आपूर्ति की कमी से थोक बाजार में खाने-पीने की वस्तुआें के दाम तेजी से बढ़े।ड्ढr वैसे सरकारी प्रयासों को कुछ राजनीतिक दलों और आर्थिक विशेषज्ञों ने नाकाफी बताकर आलोचना की है। कोयम्बटूर में माकपा नेता सीताराम येचुरी ने सरकार से माँग की कि महँगाई को थामने के लिए वायदा कारोबार पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। दूसरी तरफ, भाजपा ने कहा है कि सरकार आधे-अधूरे मन से प्रयास कर रही है और पार्टी महँगाई के खिलाफ 7 अप्रैल से राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। हालाँकि भाकपा नेता डी. राजा ने कहा कि सरकार के प्रयासों का असर तुरंत नहीं हो सकता। उधर, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य सुरेश तेंदुलकर ने कहा कि केवल ‘डय़ूटी कट’ से काम नहीं चलने वाला, भारत को अब महँगाई के साथ जीने की आदत डालनी होगी।ड्ढr केन्द्र सरकार ने सोमवार को सभी क्रूड खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क को खत्म कर दिया था और रिफाइंड खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क घटाकर 7.5 फीसदी किया था। मंगलवार को इसका असर हुआ तथा सोया तेल, सोयाबीन और सरसों पर चार फीसदी दामों की गिरावट दर्ज हुई। मंगलवार को राष्ट्रीय जिंस-वायदा बाजार (एनसीडीईएक्स) में कारोबार शुरू होते ही पिछले कुछ महीनों से उछाल मार रहे खाद्य तेल, सोयाबीन, सोया तेल और सरसों के दाम गिर गए जिससे इनका व्यापार रोकना पड़ा। इन वस्तुओं के दाम गिरने की वजह से खरीदारों ने भी कम उत्साह दिखाया। दूसरी आेर, आपूर्ति की कमी से थोक बाजार में सरसों के तेल, मूँगफली के तेल, अन्य खाद्य और अखाद्य तेल की कीमत में उछाल देखा गया। खरीदारी से सोयाबीन के तेल की कीमत प्रति कुंतल 300 रुपए बढ़कर 6,700 रुपए हो गई। जबकि सरसों के तेल की कीमत प्रति कुंतल 50 रुपए बढ़कर 6,250 रुपए और मूँगफली के तेल की कीमत प्रति कुंतल 40 रुपए बढ़कर 7,20 रुपए हो गई।ड्ढr महँगाई पर लगाम लगाने के प्रयासों में सरकार ने सोमवार को गैर बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के साथ बासमती चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर प्रति टन कर दिया था। साथ ही, राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आने वाले उत्पादों की स्टॉक सीमा तय करने का अधिकार एक साल के लिए बढ़ाने, वनस्पति के आयात पर सीमा शुल्क घटाकर 7.5 फीसदी करने, दालों के निर्यात पर लागू प्रतिबंध को एक साल बढ़ाने के फैसले भी सरकार ने किए थे। इनके अलावा घी और मक्खन के आयात पर सीमा शुल्क घटाकर 30 फीसदी करने की घोषणा भी की थी।

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  • Web Title: सरकारी कोशिशों के बावजूद थोक बाजार में दाम बढ़े