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महंगाई पर केंद्र व राज्य सरकार में ठनी

बढ़ती महंगाई को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार आमने-सामने हो गयी हैं। केन्द्र ने महंगाई रोकने के लिए राज्यों को जवाबदेह बताया तो राज्य सरकार ने भी दो टूक कह दिया है कि खुले बाजार में उपभोक्ता सामग्रियों की कीमत पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। कीमतों पर काबू पाना केन्द्र की सीधी जिम्मेदारी है। बहरहाल केन्द्र-राज्य की पेंच में जबतक कीमतें घटें तबतक महंगाई की बोझ तले दबी जनता के पास कराहने के अलावा कोई चारा नहीं है।ड्ढr ड्ढr सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की मूल्य संबंधी समिति की बैठक के बाद वित्त मंत्री पी.चिदम्बरम ने स्पष्ट तौर पर कहा कि महंगाई रोकने के प्रति राय सरकारों की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्यों को आवश्यक वस्तुआें की जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा आदेश को सख्ती से लागू करने की हिदायत दी। जवाब में मंगलवार को खाद्य एवं उपभोक्ता राज्यमंत्री सुचित्रा सिन्हा कहती हैं, हाल के दिनों में महंगाई में जबरदस्त वृद्धि हुई है लेकिन इस पर नियंत्रण केन्द्र का सीधा दायित्व है। राज्य सरकार सब्सिडी दर पर बिकने वाले गेहूं, चावल, किरासन और चीनी की कालाबाजारी करने वाले सरकारी राशन के दुकानदारों पर तो कार्रवाई कर सकती है लेकिन खुले बाजार में बिकने वाली सामग्री की कीमत पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। हां, अगर कहीं से अनाज या आवश्यक अन्य वस्तुओं की कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो जरूर कार्रवाई करेगी। वैसे अभी तो कहीं से भी ऐसी गड़बड़ी की कोई सूचना नहीं है।ड्ढr ड्ढr राज्य सरकार चावल, गेहूं, चना दाल, अरहर, आटा, मूंगफली तेल, सरसों तेल, वनस्पति, चाय, चीनी, प्याज और नमक जैसी आवश्यक सामग्रियों की खुले बाजार में आसमान छू रही कीमतों को लेकर भी केन्द्र के लगातार संपर्क में है। दरअसल, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी की समीक्षा के आधार पर ही केन्द्र राज्यों मंे उपभोक्ता सामग्रियों की कीमत के हिसाब से बाजार में उनकी आपूर्ति बढ़ा कर दरों को नियंत्रित करने का प्रयास करता है। मंत्री कहती हैं, बिहार से प्रत्येक माह आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की स्थानीय बाजार में कीमत संबंधी रिपोर्ट भेजे जाने पर भी केन्द्र की ओर से कोई राहत नहीं मिली है। वायदा कारोबार में घटे दाम थोक बाजार पर असर नहींड्ढr नई दिल्ली (एजेंसियां)। महंगाई रोकने के लिए सोमवार को केन्द्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का वायदा बाजार में थोड़ा असर हुआ है। मंगलवार को वायदा कारोबार में खाद्य तेलों, सोयाबीन, सोया तेल और सरसों के दाम में चार फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि थोक बाजार में कुछ वस्तुओं की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि आपूर्ति कम होने की वजह से दाम बढ़े हैं। केन्द्र ने सोमवार को सभी क्रूड खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क को खत्म और रिफाइंड खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क घटाकर 7.5 फीसदी करने के अलावा गैर बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने केसाथ बासमती चावल के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य 1200 डॉलर प्रति टन कर दिया था। इसके अलावा राज्यों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आने वाले उत्पादों की स्टॉक सीमा तय करने का अधिकार एक साल के लिए बढ़ाने, वनस्पति के आयात पर भी सीमा शुल्क को घटाकर 7.5 फीसदी करने, दालों के निर्यात पर लागू प्रतिबंध को एक साल बढ़ाने के फैसले भी सरकार ने किए थे। इनके अलावा घी और मक्खन के आयात पर सीमा शुल्क घटाकर 30 फीसदी करने की घोषणा भी की थी।ड्ढr ड्ढr मंगलवार को इन उपायों का असर वायदा कारोबार में दिखा। राष्ट्रीय जिंस और वायदा बाजार (एनसीडीईएक्स) में कारोबार शुरू होते ही पिछले कुछ महीनों से उछाल मार रहे खाद्य तेल, सोयाबीन, सोया तेल और सरसों के दाम में गिरावट दर्ज की गई और इस वजह से इनका व्यापार रोकना पड़ा। कर्वी कॉमट्रेड के वीरेश हीरामथ ने बताय कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इन वस्तुओं के दाम गिरे हैं। दोपहर में कारोबार फिर शुरू होने पर 10 किलोग्राम सोया तेल की कीमत सोमवार के 587.80 रुपए के मुकाबले 564.30 रुपए, सोयाबीन की कीमत करीब सौ रुपए गिरकर प्रति कुंतल 2087 और 20 किलोग्राम सरसों की कीमत सोमवार के 552.50 रुपए से गिरकर 530.40 रुपए हो गई। उधर, आपूर्ति की कमी की वजह से थोक बाजार में सरसों के तेल, मूंगफली के तेल, अन्य खाद्य और अखाद्य तेल की कीमत में उछाल देखा गया। जोरदार खरीदारी की वजह से सोयाबीन के तेल की कीमत प्रति कुंतल 300 रुपए बढ़कर 6700 रुपए हो गई, जबकि सरसों के तेल की कीमत प्रति कुंतल 50 रुपए बढ़कर 6250 रुपए और मूंगफली के तेल की कीमत प्रति कुंतल 40 रुपए बढ़कर 720 रु. हो गई।

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