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आडवाणी की किताब पर नया बवाल

भाजपा के पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी की आत्मकथा ‘माई लाइफ माई कंट्री’ के मजमून को लेकर एक और बखेड़ा खड़ा हो गया है। इस बार मामला शहीदे आजम भगत सिंह से संबंधित ऐतिहासिक सच्चाई की गलत जानकारी से जुड़ा है। किताब में कहा गया है कि क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु-सुखदेव को 1े ऐतिहासिक असेंबली बमकांड के आरोप में फांसी हुई थी। जबकि सच्चाई यह है कि इन तीनों को यह सजा लाहौर षड्यंत्र केस में सुनाई गयी थी। इतिहासकारों के साथ-साथ खुद भगत सिंह के परिवारवालों का भी कहना है कि फांसी की सजा का असेंबली बम कांड से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने मांग की है कि पुस्तक में दर्ज इस भूल को फौरन सुधारा जाना जाये। किताब में भारत-पाक से संबंधी अध्याय में आडवाणी ने लाहौर का जिक्र करते हुए लिखा है कि स्वतंत्रता आंदोलन के हमारे सबसे प्रिय भगत सिंह को अपने दो साथियों राजगुरु-सुखदेव के साथ यहां की जेल में फांसी दे दी गयी, जबकि उनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने दासता का विरोध करते हुए 1में दिल्ली असेंबली में बम फेंका था। जेएनयू के प्रोफेसर चमन लाल ने पुस्तक पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि राजगुरु और सुखदेव ने तो असेंबली बम कांड में कोई सक्रिय भूमिका अदा ही नहीं की और इस मामले में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को उम्रकैद की सजा सुनाई गयी थी। पंजाब कृषि विवि के रिटायर्ड प्रोफेसर और भगत सिंह के भतीजे जगमोहन सिंह का कहना है कि इतने वरिष्ठ राजनेता द्वारा बरती गयी इस भूल से धक्का लगा है। उन्होंने इसे सुधारने की मांग की है। इतिहासकार विपिन चन्द्र ने भी पुस्तक में दर्ज तथ्य को असत्य करार दिया है।

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