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राजरंग

ये चांद सा रौशन चेहरा, ये झील सी गहरी आंखें..तारीफ करूं क्या उनकी जिनको मदाम ने यहां भेजा है..। जी हां, उस शख्स की तारीफ की जा रही है जिसने चंद महीने पहले दिल्ली से रांची और रांची से दिल्ली तक आने-जाने के रास्ते सिर्फ गवर्नमेंट की ‘तारीफ’ में खूब कसीदे गढ़े। उनकी जुबां से निकलनेवाले शब्दों को सुनने के लिए उनके वर्कर-फॉलोअर से कहीं ज्यादा मीडिया पर्सन ललकाये रहते थे। क्या बोलते हैं जनाब। एकदम नाप-तौल कर बातें जुबां से निकालते हैं। जो बोल दिया, सो बोल दिया। क्या विजन रखते हैं। एकदम परफेक्ट मैन की तरह। जनाब की मीठी जुबां से निकली परफेक्ट बातें सुनने के लिए कान तरसते रहते थे। आंखें उनको देखने के लिए मचल उठती थीं। करप्शन से तो उनको इस कदर चिढ़ है कि करप्शन का नाम सुनते ही एकदम से उछल पड़ते हैं। गुड गवर्नेंस और करप्शन फ्री स्टेट जिनका कंसेप्ट हो, उसको बाकी बातें क्या अच्छी लगेंगी। एक बार तो लगा कि अपने स्टेट में कोई तारणहार आ गया हो। सब प्रॉब्लम खत्म ही समझिये। पब्लिक से कितना कमिटमेंट किया था। न जाने क्या हो गया, सब हवा में खो गया। अब संग-संग गीत गुनगुनाइये - क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम, वो इरादा.।

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