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तकनीकी शिक्षक ग्रेच्युटी के हकदार : हाइकोर्ट

। झारखंड हाइकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि तकनीकी शिक्षक ग्रेच्युटी के हकदार हैं। उन्हें ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाना चाहिये। बीआइटी मेसरा की एक अपील याचिका पर सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस एम कर्पग विनायगम एवं जस्टिस डीजीआर पटनायक की अदालत ने यह आदेश दिया। अदालत ने बीआइटी की याचिका खारिज कर दी और उसके इस तर्क को नहीं माना कि शिक्षक ग्रेच्युटी के दायरे में नहीं आते हैं। इस कारण ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस मामले में सिंगल बेंच के आदेश को भी उचित ठहाराया।ड्ढr बीआइटी मेसरा के सहायक प्रोफेसर(मेकेनेकिल इंजीनियरिंग) डॉ कैलाश बिहारी वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने बीआइटी से ग्रेच्युटी की मांग की। लेकिन बीआइटी ने इस आग्रह को खारिज कर दिया। इसके बाद कैलाश श्रम न्यायालय गये। श्रम न्यायालय ने बीआइटी को सूद सहित ग्रेच्युटी का भुगतान करने का निर्देश दिया। इस फैसले के खिलाफ बीआइटी ने श्रमायुक्त के पास अपील की। यहां भी अपील खारिज हो गयी। इसके बाद बीआइटी प्रबंधन हाइकोर्ट गया। जस्टिस परमोद कोहली की सिंगल बेंच ने बीआइटी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि डॉ कैलाश तकनीकी शिक्षक हैं। वह प्रैक्िटल भी कराते हैं। इंजीनयरिंग पढ़ाते हैं। इस कारण वह सामान्य शिक्षक की श्रेणी में नहीं आते हैं और वह ग्रेच्युटी के हकदार हैं।ड्ढr सिंगल बेंच ने श्रमायुक्त और श्रम न्यायलय के आदेश को भी सही ठहराया। सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ बीआइटी ने डबल बेंच में अपील याचिका दायर की। इस पर सुनवाई करने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दो अप्रैल को अदालत ने सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए बीआइटी की याचिका खारिज कर दी। कैलाश बिहारी की ओर से सीनियर वकील सोहैल अनवर ने बहस की।

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