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राजधानी में बांस की पुलिया

राजधानी की सड़कों और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है। हिंदपीढ़ी की सड़कें भी बनीं हैं, लेकिन निजाम नगर के लोगों को अब भी बांस की पुलिया से होकर अपने घर आना-जाना पड़ता है।ड्ढr बारिश के मौसम में इस पर चलना खतरनाक हो जाता है। स्थानीय सांसद और विधायक को भी इसकी जानकारी है, लेकिन पुलिया बनाने की पहल किसी ने नहीं की है। झारखंड मुसलिम महासभा के अध्यक्ष जमील खान के नेतृत्व स्थानीय लोग पुल बनाने की मांग को लेकर दो अप्रैल से बेमियादी धरने पर बैठ गये हैं। खान ने कहा कि राज्य की यूपीए सरकार मुसलमानों की उपेक्षा कर रही है। मुसलमानों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक समस्याआें की अनदेखी की जा रही है। महासभा के उपाध्यक्ष मो शोएब बबलू और मो फिरोज ने कहा कि बारिश में लोगों को पुलिया नहीं रहने से काफी परेशानी होती है।ड्ढr मो परवेज अहमद और मो एहतेशाम ने कहा कि हिंदपीढ़ी, खेत मुहल्ला और निजाम नगर की हमेशा से उपेक्षा की जाती रही है। मो असलम अंसारी, मो परवेज पारस, मो फरीद, अब्दुल बारीक, नसीम इदरीसी, मो कलाम, मो अख्तर, मो मनव्वर इकबाल, अब्दुल हाशिम, पप्पू आलम, मो जमाल बच्चा बाबू सहित अन्य लोगों ने इस अवसर पर अपने विचार रखे।ड्ढr सांसद का पुतला फूंकेंगे : हिंदपीढ़ी और निजाम नगर को जोड़नेवाली बांस की पुलिया के निकट चार अप्रैल को स्थानीय सांसद का पुतला जलाया जायेगा। हिंदपीढ़ी, राजधानी के बीच में अवस्थित और मेन रोड से सीधे जुड़ा हुआ इलाका। राजधानी को चमकाने की कवायद और बड़े-बड़े दावों के बीच एक कड़वी सच्चाई भी है। यहां स्थित निजाम नगर के लोग आज भी यहां से होकर गुजरनेवाले नाले को बांस की पुलिया से पार करते हैं। बारिश के मौसम में यह इतना खतरनाक हो जाता है, कि कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अब इसके खिलाफ लोग खड़े हो रहे हैं। देखना है कि राजधानी को फ्लाइ ओवरों से पाटने का दावा करनेवाली सरकार की नजर-ए-इनायत इस ओर होती है या नहीं।

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