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बाल पत्रकार उजागर करेंगे बच्चों की समस्याएं

‘पारू प्रखंड में दस वर्षीय टुल्लू के साथ किया गया अमानवीय व्यवहार’, बोचहां में बच्चों को नहीं मिल रहा सही ढंग से पोषाहार’। अगर आपको बच्चों से संबंधित कुछ ऐसी ही खबरें लगातार पढ़ने को मिलने लगे तो चौकिये मत, क्योंकि यह अखबार नन्हें-मुन्ने रिपोर्टरों की है। इन्हें अदिथि प्लान के चाइल्ड मीडिया प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है। ‘निर्मल विकास योजना’ के अंतर्गत विभिन्न जगहों से चुने गये 20 बच्चे अपनी कलम से केवल बच्चों की समस्याओं को उभारेंगे।ड्ढr ड्ढr कहते हैं कि पत्रकार बनना कोई बच्चों का काम नहीं है। मगर जिस उम्र में बच्चे अपनी नन्हीं दुनिया और खिलौनों के संसार में उलझे रहते हैं, वहां ये छोटे बच्चे बिना उम्र के तजुर्बे और मास कम्यूनिकेशन की डिग्री लिए हिम्मत और हौसले के बल पर नया इतिहास लिखने चले हैं। प्रोजेक्ट मैनेजर अखिलेश दूबे ने बताया कि चुने गये सभी बच्चे गरीबी रेखा से नीचे के हैं जो पत्रकारिता के साथ कमाई कर अपनी पढ़ाई भी कर सकेंगे। बच्चों को प्रत्येक महीने एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। फिलहाल अप्रैल 200तक के लिए इन्हें चुना किया गया है। इन्हें अपनी जगह से हर महीने दो खबर भेजनी होगी जो बच्चों से संबंधित समस्याएं होगी। इसके अलावा ये अन्य बच्चों को पर्सनॉलिटी डेवलपमेंट की ट्रेनिंग भी देंगे। बाल अधिकार समन्वयक संजीव कुमार ने बताया कि पूरे साल में इन बच्चों का पांच वर्कशॉप कराया जायेगा जिनमें से चुने गये 5 बच्चों को बैंकॉक भेजा जायेगा।

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