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व्यवस्था बदली तो मरीजों की संख्या बढ़ी

व्यवस्था बदली और सुविधाएं बढ़ीं तो अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हो गई। स्थिति यह है कि डाक्टरों के आने से पहले ही मरीजों की कतार पर्ची कटाने और दवा लेने के लिए लग जाती है। निजाम के बदलने से पूर्व जहां अनुमंडलीय अस्पताल में 20-30 ही मरीज पहुंच पाते थे, वहीं अब 250-300 की संख्या में रोगी प्रतिदिन आ रहे हैं। कारण कि अब चिकित्सकीय जांच के साथ-साथ उन्हें दवाईयां भी मिलने लगी हैं। मरीजों को अधिसंख्य दवाइयां अस्पताल से ही मिल जा रही हैं।ड्ढr ड्ढr फिलवक्त इस अस्पताल में इनडोर के मरीजों को 33 तथा आउटडोर के रोगियों को 37 प्रकार की दवाइयां मिल रही है। हालांकि अस्पताल में डाक्टरों की कमी रोगियों को खल रही है। डाक्टरों के स्वीकृत आठ पदों में एक लंबे अवकाश पर हैं तो दूसरे निलंबित ,जबकि डेंटिस्ट व मूर्छक का पद रिक्त है। ताज्जुब की बात तो यह है कि बिना मूच्र्छक की यहां बंध्याकरण ऑपरेशन हो रहा है। सुखद पहलु यह है कि वषरे से नहीं मिलने वाले रैबिज व टेटनस के इंजेक्शन भी आसानी से मिल जा रहे हैं। कराने आए चुवा के रामाशंकर पाल, अखलासपुर की कुंवरी देवी, भभुआ वार्ड संख्या चार की ममता कुमारी इत्यादि ने बताया कि उन्हें अपनी बारी का इंतजार तो करना पड़ रहा है, लेकिन, दवाइयां मिल जा रही हैं। सिविल सर्जन डा. उचित लाल मंडल ने बताया कि भभुआ अस्पताल में फिजिशियन, सर्जन, शिशु रोग, स्त्री रोग, दंत, आंख रोग के चिकित्सक हैं,जिनके द्वारा मरीजों का इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि आठ अप्रैल से सौ शैय्या वाले अस्पताल भवन में भी चिकित्सकीय जांच का कार्य शुरू हो जाएगा।ं

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