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विश्वविद्यालय विभागाध्यक्षों की नियुक्ित सिर्फ 3 साल के लिए

राज्य के विश्वविद्यालयों में अब कुलपति द्वारा विभागाध्यक्षों की नियुक्ित चक्रानुक्रम सिद्धांत पर मात्र 3 साल के लिए की जाएगी। साथ ही आम तौर पर किसी व्यक्ित को लगातार दो बार विभागाध्यक्ष नियुक्त नहीं किया जाएगा। वहीं एक कालेज में प्रधानाचार्य के पदस्थापन की अवधि अधिकतम पांच वर्ष के लिए होगी। यह प्रावधान बिहार राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2008 एवं पटना विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2008 के तहत किया गया है। दोनों विधेयकों को बिहार विधानसभा ने बुधवार को मंजूरी दे दी।ड्ढr ड्ढr इनके मुताबिक राज्य सरकार की पूर्वानुमति के बिना वित्तीय संग्राह्यता वाले परिनियम और नियमावली प्रवृत्त नहीं किए जाएंगे। साथ ही अब एकेडेमिक कौंसिल द्वारा अनुमोदित कम से कम 10 नामों के पैनल में से कुलपति द्वारा मनोनीत तीन विशेषज्ञ विवि के नहीं होंगे और उनमें कम से कम एक सदस्य अनुसूचित जाति-जनजाति का होगा और दो राज्य से बाहर के होंगे। विधेयक के तहत बिहार राज्य अधिवक्ता संघ के स्थान पर बिहार स्टेट बार कौंसिल प्रतिस्थापित किया गया है। इसके साथ ही सदन ने चार और विधेयकों को मंजूरी दी। इनमें बिहार स्थानीय क्षेत्रों में उपयोग, व्यवहार अथवा बिक्री के लिए मालों के प्रवेश पर कर (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक, 2008, बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार विधेयक, 2008, बिहार सहकारी सोसाइटी (संसोधन) विधेयक, 2008 और बिहार राज्य सार्वजनिक पुस्तकालय एवं सूचना केन्द्र विधेयक, 2008 हैं।ड्ढr ड्ढr उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा इंगित की गई त्रुटि को दूर करने के लिए सरकार ने मालों के प्रवेश पर कर (संशोधन एवं विधिमान्यकरण) विधेयक, 2008 पेश किया है। इसका उद्देश्य वर्ष 2007 के संबंधित अधिनियम में वर्ष 2001 और 03 में किए गए संशोधनों के तहत वसूली गई प्रवेश कर राशि को विधिमान्य करना और उसे अधिनियमित कराना है। सरकार राज्य निर्वाचन आयोग की तरह एक प्राधिकार बनाएगी जिसमें जिसे सहकारी समितियों, शिक्षा समितियों या अन्य किसी संस्था, स्थापना या संगठन जहां निर्वाचित बॉडी बनाने की जरूरत है वहां चुनाव संपन्न कराने का काम सौंपा जाएगा। इसी तरह प्राथमिक कृषि सोसाइटी का गठन ग्राम पंचायत के अनुरूप करने और आगे इस तरह की अन्य सहकारी समितियों का गठन पंचायत स्तर पर करने के लिए सहकारी सोसइटी (संसोधन) विधेयक लाया गया है। सूबे में सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना, पुनर्गठन और पुस्तकालयों के रेगुलेशन, मार्गदर्शन, नियंत्रण, सुपरविजन और उनके सुव्यवस्थित विकास के प्रावधान के लिए सरकार पुस्तकालय एवं सूचना केन्द्र विधेयक सदन में पेश किया गया। इन विधेयकों पर विमर्श में जगदानन्द, अब्दुलबारी सिद्दीकी, रामचंद्र पूर्वे, किशोर कुमार मुन्ना, डा. अच्युतानन्द, रामदेव राय, लालबाबू राय, प्रदीप कुमार, अनिल चौधरी और कृष्णनन्दन प्रसाद वर्मा वगैरह ने भाग लिया। विधानसभा का आठवां सत्र समाप्तड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। चौदहवीं विधानसभा का आठवां सत्र समाप्त हो गया। बुधवार को विधानसभाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने सभा की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा करते हुए कहा कि 22 फरवरी से 2 अप्रैल के बीच सत्र की 24 बैठकें हुई। इस दौरान 3724 प्रश्नों में से 248वीकृत हुए। साथ ही 12 विधेयक स्वीकृत किये गये।ड्ढr श्री चौधरी ने सदन की कार्यवाही के संचालन में सहयोग के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के साथ ही कर्मचारियों, पदाधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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  • Web Title: विश्वविद्यालय विभागाध्यक्षों की नियुक्ित सिर्फ 3 साल के लिए