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..और यह है बच्चा पार्टी का बैंक

एक छोटा सा काउंटर। काउंटर पर नोट गिनते और पासबुक में राशि चढ़ाते नन्हें हाथ। काउंटर के सामने नन्हें बच्चों की लंबी कतार। यह किसी ड्रामे का सीन नहीं, बल्कि एक असल बैंक का रोजमर्रा का नजारा है। इस बैंक का मैनेजर और जमाकर्ता दोनों ही बच्चे हैं। ‘चिल्ड्रेन डेवलपमेंट बैंक’ (सीडीबी) नामक यह बैंक दिल्ली समेत देश-विदेश में पांव पसार चुका है, जहां नन्हें हाथों ने बड़ी जिम्मेदारी संभाल रखी है। दरअसल सीडीबी बैंक बच्चों द्वारा बच्चों के लिए चलाया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr सीडीबी के मैनेजर, प्रबंधक कमेटी और जमाकर्ता सड़कोंपर जीवनयापन करने वाले बच्चे ही हैं। बच्चे एक रुपये से लेकर कोई भी रकम इस बैंक में जमा करा सकते हैं। यह बैंक केवल शाम 6.30 से 7.30 तक खुलता है। बच्चों को बाकायदा पासबुक दी जाती है और रजिस्टर में ऐंट्री की जाती है। वे जब चाहें रुपया निकाल सकते हैं और लोन भी ले सकते हैं। बच्चों द्वारा हर छह महीने में आपस में से किसी एक बच्चे को मैनेजर चुनना पड़ता है। बैंक की प्रबंधक कमेटी है, जिसके सदस्य भी बच्चे ही हैं। नौ बच्चों की टीम किसी का लोन स्वीकृत करती है। राजधानी के फतेहपुरी इलाके स्थित रैनबसेरा में सीडीबी बैंक काउंटर पर कतार में लगे मोरपाल ने कहा कि ‘पैसा जमा करने में मजा आता है। जब बहुत सारे पैसे जमा हो जाते हैं, तो अपनी इच्छा की चीज खरीद लेते हैं। घर भी पैसा भेजते हैं।’ फतेहपुरी ब्रांच के मैनेजर बारह वर्षीय अजय कुमार ने बताया कि बैंक में दो तरह के खाते खोले जाते हैं, एक सेंविग एकाउंट दूसरा करेंट एकाउंट। बटरफ्लाई संस्था द्वारा चलाए जा रहे इस कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर डॉ. सुमन सचदेवा ने बताया कि बैंक चलाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उनमें बचत की आदत विकसित करना है। राजधानी में फतेहपुरी, निजामुद्दीन दरगाह और आश्रम में सीबीडी की शाखाएं हैं, जबकि 14 जगहों पर कलेक्शन काउंटर है।

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  • Web Title: एक नजर