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खनिज उत्पादक जिलों में अधिक गरीबी

राज्य में खनिज बहुल क्षेत्र में गरीबी अधिक है। यह विडंबना ही है कि जो खनिज के मालिक हैं, वे बदहाल जिंदगी जी रहे हैं। राज्य की आबादी का 44 प्रतिशत हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे है। छह फीसदी लोगों को दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है। राज्य में गरीबी का अनुपात देश के अनुपात से बहुत अधिक, 26 फीसदी है। दूसरे खनन उद्योगवाले राज्यों से तुलना करें, तो गरीब लोगों के मामले में उड़ीसा के बाद झारखंड का ही नंबर है। राज्य में दो जून का पर्याप्त भोजन नहीं पानेवाले परिवारों का प्रतिशत भी काफी अधिक है। यह राष्ट्रीय औसत से पांच गुणा अधिक है। राज्य के 86 प्रतिशत जिले 150 सर्वाधिक पिछड़े जिलों में शामिल हैं। धनबाद और रांची को छोड़ कर दूसरे सभी खनिज उत्पादक जिले इसमें शामिल हैं।ड्ढr कोयला के अलावा दूसरे खनिज उत्पादक जिले पश्चिम सिंहभूम और गुमला पिछड़े जिलों की सूची में 20 वें और 5वें स्थान पर हैं। पश्चिम सिंहभूम में आयरन ओर और वन संपदा अधिक है। बावजूद इसके यहां के लोगों के जीवन में खनन उद्योग से अधिक प्रगति नहीं हुई है। लगभग आधी आबादी बीपीएल सूची में शामिल है। इस जिले के 1ीसदी परिवारों को दो-जून का भोजन भी नहीं मिलता। बाक्साइट उत्पादक जिला गुमला की भी स्थिति यही है। पश्चिम सिंहभूम जिले के 0 फीसदी गांवों में लोग ट्रकों और अन्य वाहनों से गिरनेवाले आयरन ओर को एकत्रित करके बाजार में बेचते हैं। इसका भी उन्हें पूरा दाम नहीं मिलता। सुबह-शाम भोजन की तलाश मंे लोग इधर से उधर भटकते रहते हैं।

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