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यह लोकतंत्र नहीं लोभतंत्र

ूल है या हड्डीतोड़ विभाग महान भारत के सरकारी स्कूलों में देश के कोने-कोने से शिक्षकों द्वारा बच्चों के साथ मारपीट के समाचार तो आज समय-समय पर समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल ही जाते हैं, लगता है बच्चों से मारपीट करना शिक्षकों का पहला धर्म बन गया है। ऐसे शिक्षा देने वाले सरकारी स्कूलों को बंद ही करवा दिया जाए तो र्हा क्या है? रोशन लाल बाली, महरौली, नई दिल्ली जागो मतदाता जागो 15वीं लोकसभा के गठन की प्रक्रिया का प्रथम चरण 16 अप्रैल को प्रारंभ हो जाएगा। देश के सत्तर करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मतों का प्रयोग कर पुन: देश को विश्व की लोकतांत्रिक देशों की अग्रिम पंक्ित में खड़ा करने को तत्पर हैं। परंतु खेद है कि चुनाव आयोग के सख्त निर्देश के कारण या सुलझी हुई हमारी राजनैतिक विचारधारा के अभाव में मतदाता को जागरूक करने के प्रयास बहुत कम हो रहे हैं। देश के सभी प्रसार माध्यमों को इसके प्रति जागरूक करने में सहयोग करनी चाहिए। कृष्ण मोहन गोयल, अमरोहा कर्मचारियों का रखें ख्याल चुनाव में सभी कर्मचारियों को भेजने के निर्देश दे दिए जाते हैं। उस लिस्ट में रिटायर होने वाले कर्मचारी, गर्भवती महिलाएं तथा शरीर से अक्षम कर्मचारियों के नाम भी शामिल होते हैं। कई कर्मचारी अपनी पहुंच का फायदा ले कर चुनावी डय़ूटी से बचने की जुगत में लग जाते हैं। चुनाव आयोग को चुनाव डय़ूटी लगाते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ब्रजमोहन, नई दिल्ली आखिर हम क्यों हंसते हैं? भारतीय समाज में लोग एक दूसर की भाषा पर हंसते हैं। कोई बिहारियों की भाषा पर तो कोई बंगालियों की। शायद हम भूल रहे हैं कि हम सब भारतीय हैं, जो विभिन्न संस्कृतियों को मिलाकर एकता का सूत्रपात करते हैं। हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी है, परंतु यहां विभिन्न क्षेत्रों के रहने वाले विविध भाषी लोग हिंदी बोलेंगे तो उनके हिंदी में स्थानीय भाषा की झलक तो महसूस होगी ही। इस प्रकार भारत में विभिन्न प्रकार की जो हिंदी हुई, वह सारी हिंदी ही है, जिस पर सभी हिन्दवासी को गौरवान्वित होना चाहिए। सैयद जाबिर हुसैन, नई दिल्ली

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