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रद्द नहीं होगा दाखिला

राज्य सरकार का दावा है कि रिम्स के 2007 बैच के 0 छात्र-छात्राओं का नामांकन रद्द नहीं होगा। गुरुवार को नयी दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से मुलाकात के बाद विशेष सचिव निधि खरे ने बताया कि भारत सरकार ने रिम्स में नामांकन पर लगी रोक पांच जून 2007 को ही हटा ली थी। स्वास्थ्य विभाग को भारत सरकार की चिट्ठी मिल गयी है।ड्ढr इस तरह रिम्स में छात्र-छात्राओं का लिया गया नामांकन वैध है। इसमें एमसीआइ का निर्देश मायने नहीं रखता है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव से हुई बातचीत का ब्योरा देते हुए श्रीमती खरे ने बताया कि भारत सरकार ने सात मई 2007 को रिम्स में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। पत्र में कहा गया था कि रिम्स में चिकित्सक शिक्षकों और आधारभूत संरचनाओं की कमी है। इन कमियों को दूर किये बिना 2007-08 बैच में नामांकन नहीं लिया जाये। इस पत्र के जवाब में 21 मई 2007 को रिम्स निदेशक ने भारत सरकार को कंप्लायंस रिपोर्ट भेजी। इसकी एक प्रति एमसीआइ को भी दी गयी। कंप्लायंस रिपोर्ट में कहा गया रिम्स प्रबंधन अस्पताल की कमियों को दूर कर रहा है।ड्ढr ऐसे में उनलोगों को नामांकन की अनुमति दी जाये। इस कंप्लायंस रिपोर्ट के आधार पर पांच जून 2007 को भारत सरकार ने रिम्स में सत्र 2007-08 में नामांकन की अनुमति दे दी।ड्ढr नामांकन पर लगी रोक हटाने की सूचना रिम्स निदेशक और एमसीआइ को भेजी गयी। हालांकि किसी कारणवश निदेशक को यह पत्र नहीं मिल सका। पत्र नहीं मिलने के कारण ही उलझन पैदा हुई है। सरकार पर भरोसा नहीं रिम्स छात्र-छात्राओं ने सरकार के नामांकन रद्द नहीं होने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। छात्रों ने कहा है कि अब सवाल सिर्फ 2007 बैच के छात्र-छात्राओं का नामांकन रद्द होने का नहीं, बल्कि संस्थान की मान्यता का है। एमसीआइ ने संस्थान की मान्यता को समाप्त किया है। राज्य सरकार केंद्र के जिस 5 जून 2007 के पत्र को आधार बना रही है, उसमें भी इस बात का जिक्र किया गया है कि संस्थान की मान्यता एमसीआइ की रिपोर्ट के आधार पर ही बहाल होगी। ऐसे में अगर 2007 बैच का नामांकन बहाल हो भी जाये, तो बिना एमसीआइ के हरी झंडी के उनकी डिग्री को मान्यता नहीं होगी। छात्रों ने कहा है कि जबतक एमसीआइ से संस्थान को मान्यता नहीं मिल जाती, उनलोगों को आंदोलन जारी रहेगा। इस मुद्दे पर जेडीए की बैठक गुरुवार शाम एनाटामी लेक्चर थियेटर में हुई। इसमें कहा गया है कि सरकार पूरे मुद्दे पर छात्र-छात्राओं को भ्रम में रख रही है। एक साल पहले की चिट्ठी दिखाकर उनलोगों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। जबतक एमसीआइ से संस्थान को मान्यता नहीं मिल जाती, उनलोगों को भविष्य सुरक्षित नहीं है। वे लोग इसके लिए आंदोलन करेंगे। शुक्रवार को रिम्स के सभी छात्र-छात्रायें इमरजेंसी के समक्ष धरना पर बैठेंगे। दोपहर एक बजे के बाद पीजी चिकित्सक भी धरना में शामिल होंगे। जबतक उनलोगों को ठोस जवाब नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले गुरुवार को भी रिम्स के छात्र-छात्रायें निदेशक कार्यालय के समक्ष धरना पर बैठे और निदेशख तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। चेतावनी की होती रही अनदेखी रिम्स के सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में है। संस्थान की मान्यता को लेकर संस्पेंस बरकार है। जबकि इस पूरी स्थिति के लिए छात्र-छात्राओं ने सीधे तौर पर निदेशक और विभागीय मंत्री को जिम्मेवार ठहराया है। छात्रों का कहना है कि एमसीआइ वर्ष 2005 से ही संस्थान में चिकित्सा शिक्षकों की कमी पर आपत्ति जताते हुए इसे दूर करने का निर्देश देता आ रहा है।ड्ढr दूसरी ओर निदेशक और विभागीय मंत्री ने एमसीआइ की इन आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया। इसका नतीजा हुआ कि एमसीआइ ने मई 06 में संस्थान की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा करते हुए नामांकन पर रोक लगा दी। 0 सितंबर 2005 को एमसीआइ ने संस्थान में एमबीबीएस डिग्री की मान्यता बहाल रखने के लिए निरीक्षण किया। निरीक्षण में एमसीआइ ने संस्थान में चिकित्सा शिक्षकों की कमी पायी और इसे दूर करने का निर्देश दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रयास से एमसीआइ संस्थान के दोबारा निरीक्षण के लिए तैयार हुई। एमसीआइ ने फिर से निरीक्षण किया। इस बार भी चिकित्सकों की कमी बतायी और इसे दूर करने के लिए कहा। करीब एक साल बीत जाने के बाद भी इन रिक्त पदों पर चिकित्सकों की नियुक्ित नहीं हुई। दिंसबर 07 में एमसीआइ ने फिर से निरीक्षण के लिए समय दिया। आनन-फानन में चिकित्सकों की नियुक्ित के लिए विज्ञापन निकला। 2रवरी 08 तक आवेदन लिये गये। अभी इन आवेदनों की स्क्रूटनी ही की जा रही है। कार्यरत चिकित्सकों को प्रोन्नति शीघ्र दिये जाने के मंत्री के दावों के बाद भी आज तक चिकित्सकों को प्रोन्नति नहीं मिली। मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा हैरांची। रिम्स के 2007-08 बैच के एमसीआइ के निर्देश से परेशान हैं। उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। पिछले दो दिन से ये छात्र रिम्स निदेशक कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हैं।ड्ढr इस बाबत प्रदीप ने कहा कि उसका भविष्य अंधकारमय होता दिखा रहा है। काफी मेहनत कर उसने मेडिकल में एडमिशन लिया। अब उन्हें कहा जा रहा है कि उनका एडमिशन रद्द कर दिया जायेगा। एडमिशन लेने के पूर्व उन्हें इसकी जानकारी मिली होती, तो वह कहीं और नामांकन लेते।ड्ढr राजन ने कहा कि मेहनत से तैयारी कर मेडिकल प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। अब लगता है सारी मेहनत पर पानी फिर गया है। इससे उनके माता-पिता भी चिंतित हैं।मोनिका ने कहा कि एमसीआइ और रिम्स प्रबंधन किसी को छात्रों की चिंता नहीं है। सभी नियम और कानून का रोना रो रहे हैं। छात्र हित को ध्यान में रखते हुए इस मामले में ठोस पहल होनी चाहिए।ड्ढr निधि ने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार दोषी है। समय रहते यदि नियुक्ित की प्रक्रिया पूरी हो गयी होती, तो छात्रों का भविष्य अंधकारमय नहीं होता।ड्ढr शिल्पी ने कहा कि जबसे एमसीआइ के निर्देश की जानकारी मिली है, सभी परेशान हैं। खाना-पीना, पढ़ाई-लिखाई सब कुछ छूट गया है। एमबीबीएस में होगी 150 सीटें : मंत्री रांची। स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही ने रिम्स के मुद्दे पर गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ अबुमणि रामदौस से मुलाकात की। इस संबंध में श्री शाही ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि रिम्स के छात्र-छात्राओं का नामांकन रद्द नहीं होगा। इसी वर्ष से रिम्स में 150 एमबीबीएस सीटों पर पढ़ाई प्रारंभ करने की अनुमति दी जायेगी। केंद्रीय मंत्री ने बोकारो डेंटल कॉलेज और रिम्स के निरीक्षण के लिए टीम भेजने की बात कही। रिम्स को पीएमजीएसवाइ के तहत मिलनेवाले पैसे भी शीघ्र मिलेंगे। शाही ने केंद्रीय मंत्री को रिम्स में योजनाओं के शिलान्यास के लिए झारखंड आने का न्योता दिया। रिम्स में बीएससी नर्सिग कॉलेज की स्थापना के लिए 2.5 करोड़ तथा राज्य के सभी जिलों में एएनएम स्कूल की स्थापना के लिए दो करोड़ रुपये देने पर भी सहमति बनी। 0 सितंबर 2005- एमसीआइ ने रिम्स का निरीक्षण किया, चिकित्सकों की कमी पायी।ड्ढr मई 2006- एमसीअॉइ ने रिम्स की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की।ड्ढr 25 मई 2006- सरकार गंभीर हुई, विकास आयुक्त और शिवुेंद दिल्ली गये।ड्ढr 25 मई 2006- एमसीआइ की आपत्तियों को दूर करने के लिए दो माह का समय मिला।ड्ढr 6 जुलाई 2006- भारत सरकार ने रिम्स में एमबीबीएस के नामांकन पर रोक लगायी।ड्ढr 24 जनवरी 2007- भारत सरकार ने नामांकन नहीं लेने का रिमाइंडर भेजा।ड्ढr जनवरी-फरवरी 07- सरकार के अनुरोध पर एमसीआइ ने दोबारा निरीक्षण किया, चिकित्सकों के 34.1 प्रतिशत पद रिक्त पाये।ड्ढr 07 मई 2007- भारत सरकार ने नामांकन नहीं लेने का फिर से निर्देश दिया।ड्ढr 21 मई 2007- रिम्स निदेशक ने कंप्लायंस रिपोर्ट भेजकर नामांकन की अनुमति मांगी।ड्ढr 5 जून 2007- भारत सरकार ने एमसीआइ से मिलनेवाली रिपोर्ट की प्रत्याशा में नामांकन की अनुमति दी।ड्ढr 18 मार्च 2008- एमसीआइ ने बैच 2007-08 का नामांकन रद्द करने का निर्देश दिया।ं

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