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स्टीफन और कांग्रेस के दबाव में नियेल को बनाया संयोजक

। ईसाई और सरना धर्म के मामले में जांच के लिए गठित विधानसभा की विशेष कमेटी के अस्तित्व पर भाजपा-जदयू के विधायक भड़क उठे हैं। विशुनपुर के भाजपा विधायक चंद्रेश उरांव ने कहा है कि स्टीफन मरांडी और कांग्रेस के दबाव आकर ही विधानसभा अध्यक्ष आलमगीर आलम ने ईसाई विधायक नियेल तिर्की को कमेटी का संयोजक बना दिया। यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच कार्य को प्रभावित करने की मंशा से ही इस तरह की कमेटी गठित की गयी है और इसीलिए नियेल तिर्की को कमेटी का संयोजक बनाया गया है। उरांव ने विस अध्यक्ष के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ईसाइयों के विरोध में ही तो विधानसभा में यह मामला उठाया गया था। यह मामला पूरी तरह से आदिवासियों के अस्तित्व से जुड़ा मामला है। धर्म परिवर्तन कर आरक्षण का लाभ तथा संवैधानिक सुविधाएं प्राप्त करने के मामले में भाजपा-जदयू विधायकों ने जोरदार हंगामा किया था। लगातार दो दिन तक सत्ता- विपक्ष के बीच हुई नोंक- झोंक के बाद जांच के लिए विशेष कमेटी के गठन की घोषणा हुई थी। इस मामले में वैसे सत्ता पक्ष किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार नहीं था। कमेटी में कांग्रेस विधायक नियेल तिर्की को संयोजक तथा झामुमो विधायक सुशीला केरकेट्टा, जदयू विधायक रमेश मुंडा, भाजपा विधायक चंद्रेश उरांव तथा राजद विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी को शामिल किया गया है। चंद्रेश उरांव का कहना है कि कमेटी में ईसाई विधायक को संयोजक बनाने का फैसला सही नहीं है। यह तो वही बात हुई कि दूध की रखवाली के लिए बिल्ली की पहरेदारी लगा दी गयी।ड्ढr उरांव के मुताबिक कमेटी में और भी आदिवासी विधायकों को शामिल किया जाना चाहिये था। संयोजक भी सरना विधायक को बनाना था। क्या कमेटी की बैठक में नहीं जायेंगे, सवाल पर उरांव ने कहा कि बैठक में तो जायेंगे जरूर, लेकिन लिखित तौर पर विरोध दर्ज करायेंगे। आदिवासी विधायकों को एकजुट करेंगे। उन्होंने कहा कि वैसे भी जनजातीय समुदाय शुरू से छले जा रहे हैं। यूपीए सरकार भी खुल्लमखुल्ला ईसाइयों का साथ दे रही है। कमेटी के गठन में पारदर्शिता नहीं बरती गयी : रमेश मुंडाड्ढr रांची।जदयू विधायक रमेश सिंह मुंडा ने कहा है कि कमेटी के गठन में पारदर्शिता नहीं बरती गयी है। मुंडा का कहना है कि कड़िया मुंडा जैसे वरिष्ठ और अनुभवी आदिवासी नेता को कमेटी में शामिल नहीं किया जाना दुखद है। बड़ी कमेटी का गठन किया जाना चाहिये था। कमेटी देखने से लगता है कि इसे एजेंडा के रूप में इस्तेमाल किया गया है। कमेटी का गठन किये जाने से अच्छा होता कि इसमें सभी गैर आदिवासी विधायकों को शामिल किया जाता। चंद्रेश उरांव से सीनियर हैं नियेल तिर्की : स्पीकरड्ढr रांची। विस अध्यक्ष आलमगीर आलम का कहना है कि कमेटी गठन में पूरी पारदर्शिता बरती गयी है। भाजपा विधायक चंद्रेश उरांव का आरोप निराधार है। आलम के मुताबिक कमेटी में दो ईसाई, दो सरना और एक सामान्य कोटि के सदस्य को शामिल किया गया है। मामला दोनों धर्म से जुड़ा है। साथ ही नियेल तिर्की चंद्रेश उरांव से सीनियर एमएलए हैं। स्पीकर के मुताबिक चंद्रेश उरांव अपनी इच्छा के मुताबिक संयोजक बनवाना चाहते थे। ऐसे लोगों का कोई उपाय नहीं विश्वास तो करना होगा : नियेलड्ढr रांची।भाजपा विधायक के आरोप पर नियेल तिर्की ने कहा है कि विश्वास तो रखना ही होगा। लेकिन ऐसे लोगों की मंशा देख यही लगता है कि कोई उपाय नहीं है। तिर्की ने कहा कि मैं आदिवासियों के प्रति सहानुभूति रखता हूं। सवालों पर संघर्ष करता हूं, चाहे वह ट्राइबल हो या नन ट्राइबल। भाजपा विधायकों ने तो सदन में भी बेवजह इस मामले को तूल दिया था। कमेटी के अध्यक्ष की हैसियत से मैं निष्पक्ष तरीके से जांच रिपोर्ट तैयार करूंगा।

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  • Web Title: स्टीफन और कांग्रेस के दबाव में नियेल को बनाया संयोजक