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अपनी ‘अमानत’ बेचने के लिए दर-दर घूम रहा नाहीद

गरीबी और बीमारी ने इतना तंग किया कि गुफरान नाहीद अपनी ‘अमानत’ बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है। यह ‘अमानत’ नाना ने उसके बर्थडे के अवसर पर गिफ्ट के तौर पर दी थी। इसमें वर्षो कड़ी मेहनत कर जमा किये गये देश-विदेश के बेशकीमती डाक टिकट हैं। नाहीद ने भी कठिन परिश्रम कर कई दुर्लभ डाक टिकट जुटाये और एक-एक नग की तरह उसमें जड़ा।ड्ढr अपनी ‘अमानत’ को वह दिलोजान से चाहता है और अब तक उसे सहेज कर रखा। लेकिन अब उसके पास कोई दूसरा चारा नहीं है। हुलहुंडू के सिलादोन के रहनेवाला गुफरान नाहीद के परिवार में कुल सात सदस्य हैं। तीन में से दो बहनों की शादी हो गयी है। एक की अभी करनी है। एक तो बहन की शादी और दूसरे अपनी बीमारी से परेशान नाहीद को कुछ सूझ नहीं रहा है। पिताजी एचइसी में थे, उन्होंने वीआरएस ले लिया। जो पैसा मिला, उससे दो बहनों की शादी हुई। लेकिन अब घर का खर्च चलाने के लिए लाले पड़े हैं। नाहीद अपनी ‘अमानत’ लेकर बुधवार को मुख्य डाकघर पहुंचा। वहां के अधिकारी अनिल कुमार और डीपी श्रीवास्तव से मिला। उन्हें अपनी पीड़ा सुनायी। उन्होंने कहा कि उनके यहां ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे उसकी ‘अमानत’ को खरीदा जा सके। लेकिन पीड़ा सुन अधिकारी इतने द्रवित हो उठे कि उन्होंने रांची, जमशेदपुर, पटना और कोलकाता के चार लोगों का पता दिया।ड्ढr उन्होंने कहा कि वे उनकी इस अनूठी ‘अमानत’ के कद्रदान हैं, और वे ही उसकी मदद कर सकते हैं। मुंबई में भी उसने अपनी ‘अमानत’ को बेचने की पेशकश की थी।ं

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