DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सचिव का आदेश मानने से आयुक्त का इंकार

गया जिला पर्षद के पदच्यूत अध्यक्ष शोभा सिंह के पुन: अध्यक्ष पद पर बहाल करने के पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव पंचम लाल के आदेश का अनुपालन नहीं किया जाएगा। इस बीच स्वत: प्रभार लेने के बाद श्रीमती के चैम्बर में आयुक्त के निर्देश पर जिपकर्मियों ने ताला जड़ दिया है।ड्ढr ड्ढr मगध प्रमंडल के आयुक्त के पी रमैया ने प्रधान सचिव के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि जिला पर्षदअध्यक्ष के मामले में पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव को न तो किसी तरह की सुनवाई करने का अधिकार है और न ही किसी तरह के आदेश देने का। इस बाबत कुमारी शोभा सिन्हा ने कहा है कि अब सरकार समझे कि उसके प्रधान सचिव का अदेश ऊपर है या आयुक्त का। आयुक्त ने कहा कि जिला पर्षद अध्यक्ष कुमारी शोभा सिन्हा को पदच्यूत करने का आदेश उन्होंने एक न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत न्यायालय के अंदर दिया है। उनके आदेश की सुनवाई राजस्व पर्षद के सदस्य के समक्ष अपील के रूप में ही किए जाने का प्रावधान है। श्री रमैया ने बताया कि न्यायालय के आदेश को किसी भी तौर से कार्यालय आदेश से निरस्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधान सचिव के जिप अध्यक्ष के बारे में दिए गए तथाकथित कार्यालय आदेश वैधानिक नहीं होने से अनुपालन योग्य नहीं है। श्री रमैया ने स्पष्ट कहा कि प्रधान सचिव पंचम लाल के आदेश पर जिला पर्षद के पदच्यूत अध्यक्ष को किसी भी स्थिति में पुन: बहाल नहीं किया जा सकता।ड्ढr ड्ढr विदित हो कि शोभा सिन्हा को वित्तीय अनियमितता (15 प्रतिशत राशि को अपनी मर्जी से खर्च करने ) के मामले में आयुक्त ने 20 मार्च को पदच्यूत कर दिया था। अध्यक्ष पर वित्तीय अनियमितता सहित कई तरह की गड़बड़ी करने का आरोप जिला पर्षद उपाध्यक्ष अनुज कुमार सिंह ने लगाया था। आयुक्त ने इसकी सुनवाई अपने न्यायालय में लंबे समय तक की थी। आयुक्त ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने और कारण पृच्छा करने के बाद 20 मार्च को अध्यक्ष को पदच्यूत करने का आदेश निर्गत किया था। आयुक्त के आदेश के बाद जिप अध्यक्ष के समर्थकों को काफी हंगामा किया था और उसको न्यायालय एवं सरकार के पास चुनौती दी थी। अध्यक्ष की चुनौती पर पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव ने बुधवार को आदेश जारी कर जिप अध्यक्ष को पद पर पुन: बहाल करने तथा प्रमंडलीय आयुक्त के आदेश को निरस्त करने का आदेश दिया। उनका कहना है कि एक फरवरी 2008 से प्रभारी बिहार पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2007 के तहत आयुक्त को किसी भी जिला पर्षद अध्यक्ष को पदच्यूत करने का अधिकार नहीं है। प्रधान सचिव श्री लाल ने इसी अधिनियम का हवाला देकर जिप अध्यक्ष को पुन: बहाल करने का आदेश दिया है।ड्ढr इसी बीच, प्रधान सचिव के आदेश मिलने के बाद श्रीमती सिन्हा ने गुरुवार को जिला पर्षद कार्यालय पहुंचकर स्वत: प्रभार संभाल लिया। इसकी सूचना मिलने पर आयुक्त ने जिप कर्मियों को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई और कहा कि प्रधान सचिव का आदेश अमान्य कर दिया गया है,अतएव जिला पर्षद के अध्यक्ष पद पर शोभा सिन्हा प्रभार नहीं ले सकतीं। जिप कर्मियों ने उसके बाद उनके चैम्बर को खाली कराया और उसमें ताला जड़ दिया। इस घटना से शोभा सिन्हा के समर्थकों में रोष है। आयुक्त के स्टैण्ड से सरकार हतप्रभड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। गया जिला परिषद की अध्यक्ष को हटाने और बनाए रखने को लेकर पंचायती राज विभाग और मगध के प्रमंडलीय आयुक्त आमने-सामने हैं। इधर राज्य सरकार प्रमंडलीय आयुक्त के स्टैण्ड से हतप्रभ है। प्रमंडलीय आयुक्तके आदेश को निरस्त करने के पीछे सरकार की यह दलील है कि राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार जिला परिषद अध्यक्ष को पद से हटाना प्रमंडलीय आयुक्त के क्षेत्राधिकार से बाहर है। पंचायती राज अधिनियम में संशोधन के बाद यह अधिकार राज्य सरकार में निहित कर दिया गया है। इस बीच, सांसत में फंसी है जिप अध्यक्ष शोभा सिन्हा की कुर्सी।ड्ढr ड्ढr मगध के प्रमंडलीय आयुक्त ने जिला परिषद अध्यक्ष को पद से हटाया तो राज्य सरकार ने संशोधित अधिनियम का हवाला देकर उनके आदेश को निरस्त कर दिया। मामले में अब नया मोड़ आ गया है। पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव पंचम लाल के नए आदेश के बाद भी प्रमंडलीय आयुक्त के.पी.रमैया अपने स्टैण्ड पर कायम हैं। सीधे तौर पर उन्होंने पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव के आदेश को ही चैलेंज कर दिया है। श्री रमैया की नजर में प्रधान सचिव को उनके आदेश को निरस्त करने का अधिकार नहीं है। अब मगध के प्रमंडलीय आयुक्त के ताजा बयान से पूरा मामला गरमा गया है। यह माना जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण में अब किसी न किसी की कुर्सी की बलि तय है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: सचिव का आदेश मानने से आयुक्त का इंकार