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जस्टिस चौधरी पर मुशर्रफ व पीपीपी के सुर एक

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को बचाने के लिए अपदस्थ मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी को छोड़कर अन्य सभी अपदस्थ जजों को बहाल करने तथा बहाली के पहले उनसे जनरल मुशर्रफ के खिलाफ मुकदमें नहीं खोलने का वचन लेने का गुपचुप अभियान चलाया है। सरकार में पीपीपी के एक मंत्री ने हाल ही में राजधानी के जजेज इन्कलेव में कई अपदस्थ जजों से मुलाकात कर उन्हे इस बात पर राजी करने की कोशिश की कि नई सरकार उन्हें बहाल करने के साथ संवैधानिक सुरक्षा भी देगी बशर्ते वे वादा करें कि जनरल मुशर्रफ के खिलाफ कोई मामला नहीं शुरू करेंगे। ‘दि न्यूज’ की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया गया है कि पीपीपी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा रची गई इस योजना में अपदस्थ मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की बहाली को रोकना भी शामिल है। सूत्र ने बताया कि मंत्री ने जजों से अलग-अलग मुलाकात की और कहा कि उसने अन्य जजों से भी इसी फामरूले पर बात की है जिस पर वे सब राजी हैं। लेकिन बाद में जब सारे जज आपस में मिले तो पता चला कि मंत्री उन्हें झांसा दे रहा था। यह योजना जस्टिस चौधरी की बहाली रोकने के लिए बनाई गई है। इसके तहत एक संवैधानिक पैकेज तैयार किया गया है। यदि इसे स्वीकार कर लिया गया तो सुप्रीम कोर्ट के सभी जज बर्खास्त कर दिए जाएंगें तथा एक संसदीय समिति द्वारा जांच एवं अनुशंसा के बाद उन्हें पुनर्नियुक्त किया जाएगा। योजना तैयार करने वाले सख्स ने बड़ी सफाई से एक मूल मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया कि यदि संसदीय दल द्वारा वर्तमान जजों की जांच को अनिवार्य बना दिया जाता है तो प्रत्येक जज विवादों के दलदल में फंस जाएगा। वकील, मीडिया और सार्वजनिक जीवन के तमाम लोग प्रत्येक जज के बारे में गड़े मुर्दे उखाड़ने लगेंगे। इससे न्यायपालिका ढांचा ही नष्ट हो जाएगा। सुप्रीमकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ऐतजाज अहसान पहले ही इस तरह की किसी भी संभावित साजिश के खिलाफ चेतावनी दे चुके है। जब इस नई साजिश के बारे में उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि यह साजिश राष्ट्रपति के समर्थक गुट ने रची है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति सोचते हैं कि इस साजिश के जरिए वह जस्टिस चौधरी को संसदीय समिति में विवादास्पद करार दिलवा कर उनकी बहाली रुकवा देंगे। एक प्रमुख न्यायविद जस्टिस (सेवानिवृत्त) तारिक महमूद ने कहा कि पीपीपी के एक शीर्ष विधिवेत्ता ने उनसे भी माइनस वन फामरूले पर चर्चा की थी। उन्होंने बताया कि पीपीपी नेता उन्हें जस्टिस चौधरी को इस बात के लिए राजी करने की कोशिश करें कि यदि जस्टिस चौधरी बहाली के तुरंत बाद पद से इस्तीफा दे दें। रिपोर्ट के अनुसार एक सरकारी समिति एवं संसद इस बात का अंतिम निर्णय लेगी कि जजों की बहाली एक प्रस्ताव पारित करके की जाए या फिर संविधान संशोधन के जरिए। समिति के सदस्यों के नामों पर कैबिनेट फैसला करेगी। यह समिति अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपेगी। इस बीच पीपीपी के सह अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी ने मुरी घोषणापत्र के मुताबिक अपदस्थ जजों की बहाली के संकल्प को दोहराया है। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की खातिर एक पैकेज की भी घोषणा की है। उन्होंने भविष्य में जजों को हटाकर न्यायपालिका के साथ सत्ताधारी व्यक्ितयों द्वारा खिलवाड़ रोकने की भी पूरी व्यवस्था करने का भी ऐलान किया है।

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  • Web Title: जस्टिस चौधरी पर मुशर्रफ व पीपीपी के सुर एक