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इस्पात नीति में सहभागी नहीं बन पा रहा झारखंड

देश में स्टील की मांग बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने इस्पात नीति बनायी। इसके तहत वर्ष 2020 तक 243 मिलियन टन उत्पादन के लिए देशभर में एमओयू किये गये। वैसे 2020 तक 220 मिलियन टन स्टील उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं 2010 तक मात्र 110 मिलियन टन लक्ष्य निर्धारित था। झारखंड सहित चार अन्य आयरन ओर उत्पादक राज्यों में 1टील प्लांट लगाने के लिए एमओयू हुए। इनमें 5140 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव आया।ड्ढr झारखंड में स्टील उत्पादन के लिए 57 कंपनियों ने एमओयू किया। इसमें मिलियन टन अकेले इस राज्य में स्टील उत्पाद का लक्ष्य रखा गया। एमओयू तो हुए, लेकिन 57 में से मात्र छह छोटी कंपनियां स्पंज आयरन के उत्पादन के लिए कारखाना लगा पायी हैं। 11 मेगा उद्यमियों को अब तक जमीन नहीं मिली है। इसलिए प्लांट नहीं लगा। वर्तमान में स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि 2012 तक कोई भी मेगा स्टील प्लांट लग पायेगा। इस स्थिति में झारखंड देश की इस्पात नीति में सहभागी नहीं बन पायेगा।ड्ढr राज्य में सेल, टाटा स्टील, एस्सार जेएसडब्ल्यू, जेएसपीएल इस्पात इंडस्ट्रीा, भूषण स्टील आदि मेगा इनवेस्टरों ने स्टील प्लांट लगाने के लिए एमओयू किया है। एक तरफ राज्य सरकार का कहना है कि जब तक ये कंपनियां जमीन लेकर चाहरदीवारी खड़ी नहीं कर देतीं, इन्हें आयरन ओर नहीं मिलेगा। भले ही खनिज के लिए इन कंपनियों को केंद्र सरकार की पूर्वानुमति मिल चुकी हो। राज्य सरकार इनके लीज लाइसेंस की प्रक्रिया रोके रखेगी। कंपनियां जब जमीन के लिए क्षेत्र में जाती हैं, तो उनका जमकर विरोध होता है। ऐसे में इन कंपनियों के समझ कोई विकल्प नजर दिख रहा। राज्यएमओयूक्षमतानिवेशड्ढr (एमटी)करोडड़्ढr झारखंड57उड़ीसा 4678.21छत्तीसगढ़5633.88प. बंगाल1221333ड्ढr अन्य 2218.2206ड्ढr योग10

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