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महंगाई को हथियार बनाने की माआेवादियों की तैयारी

सिर चढ़कर बोलती महंगाई केन्द्र और राज्य सरकार के लिए वोट का मुद्दा हो सकती है। पर, रेड कॉरिडोर की राह पर निकले माओवादियों के लिए महंगाई उनके संगठन को मजबूत करने का हथियार बन सकती है। माओवादी इसका फायदा उठाने की योजना बना रहे हैं। खासकर मजदूर, बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा और महंगाई से परेशान मध्यवर्ग उनके निशाने पर हैं। केन्द्र और राज्य सरकार दोनों ही के लिए महंगाई पर माओवादियों की यह तैयारी बड़ा अल्टीमेटम है। भाकपा(माओवादी) ने महंगाई को केन्द्र सरकार की कमजोर नीतियों में शुमार करते हुए अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। माओवादियों ने बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से परेशान मध्य वर्ग को ध्यान में रखकर उन्हें संघर्ष के लिए प्रेरित करने की योजनाएं बनायी हैं।ड्ढr ड्ढr भाकपा (माओवादी) के महासचिव गणपति ने अपने एक साक्षात्कार में इस बात के संकेत भी दिए हैं। कहा गया है कि मध्य वर्ग के एक बड़े हिस्से में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और पारिवारिक खर्चो में भारी वृद्धि से असंतोष और झुंझलाहट बढ़ी है। माओवादी इस असंतोष को संगठन की मजबूती के तौर पर देख रहे हैं। बताया जाता है कि माओवादियों ने केन्द्र सरकार की ताकतों और कमजोरियों का विशेष अध्ययन भी शुरू किया है। संगठन इसे सरकार के कमजोर पहलू के तौर पर देख रहा है। इस कमजोर कड़ी पर अब हमले की रणनीति तैयार की जा रही है। माओवादी संगठनों ने बढ़ती महंगाई को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हुए खासकर शहरी क्षेत्र के मजदूर वर्ग, छात्रों, युवाओं, मध्यवर्ग, छोटे व्यापारियों और फेरीवालों के बीच अपनी पैठ बनाने की योजना बनायी है। जानकारों की मानें तो जन समर्थन जुटाने की माओवादियों की यह रणनीति उनके खिलाफ केन्द्र और राज्य सरकार की बढ़ती दबिश से उबरने का हिस्सा भी हो सकती है।ं

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  • Web Title: महंगाई को हथियार बनाने की माआेवादियों की तैयारी