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महंगाई अब पहुंची ‘सातवें’ आसमान पर

महंगाई के चक्रव्यूह में फंसी मनमोहन सिंह सरकार को इससे निकलने का कोई आसान रास्ता नहीं दीख पड़ रहा है। चीनी, चना, सरसों का तेल, वनस्पति और प्याज की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान 11 फीसदी बढ़ोतरी से मुद्रा स्फीति की दर 7 फीसदी जा पहुंची जो पिछले 3माह में अधिकतम है। हालांकि चावल, गेहूं, आटा, तुअर, मूंगफली, आलू और नमक की कीमतों में इस दौरान कोई घट-बढ़ नहीं हुई।ड्ढr हाल में उसने सुरसा का मुंह बनी महंगाई पर ताला डालने के लिए खाद्य तेलांे पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया और गैर बासमती चावल के निर्यात पर भी रोक लगा दी। लेकिन महंगाई ने चीनी, चना और कुछ अन्य रोजमर्रा की चीजों को सीढ़ी बना लिया। ऐसे में सरकार के पास जो एक कड़वा विकल्प रह जाता है, वह है पहले से ही ऊंची ब्याज दर को और महंगा बनाया जाये। जाहिर है कि इसकी कीमत विकास दर में कुछ कमी से चुकानी होगी। इससे निकट- भविष्य में आम आदमी के अपना घर का सपना भी मृग-मरीचिका बन जायेगा।ड्ढr साल भर से भी कम समय में सिर पर खड़े चुनाव को देखते हुए सरकारी तंत्र से ‘जमाखोरी’ और ‘कालाबाजारी’ के खिलाफ दहाड़ सुनायी देने लगी है। वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने कहा ‘हम खाने-पीने के सामान, सीमेंट या स्टील की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कानूनी प्रावधानों समेत सख्त से सख्त कदम उठाने में जरा भी नहीं हिचकिचायंगे।’ लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो खाद्य पदाथरे और जिंसों की किल्लत ने दुनिया भर के देशों में कीमतों में आग सी लगा दी है। मांग, आपूर्ति की इस खाई को पाटने में कुछ वक्त यहां तक कि कुछ वर्ष तक लग सकते हैं। फिक्की के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखरन ने कहा ‘भारत के मामले में कृषि क्षेत्र की विकास दर में गिरावट ने और भी आग लगाई है।’ उनका यह बयान निकट-भविष्य में कीमतों में कमी आने का कम से कम संकेत नहीं ही देता है, ‘अगर आप मुझसे कीमतों में बढ़ोतरी न करने की कहते हैं तो मैं ऐसा एक दिन या ज्यादा से ज्यादा एक महीने के लिए कर सकता हॅूं। अंत में तो यह बाजार है जो कीमत तय करेगा।’ हालांकि व्यापारियों के मुताबिक, सरकारी प्रयास का असर अगले सात से दस दिनों में दिखने लगेगा।ड्ढr प्राथमिक वस्तुआें के समूह के सूचकांक में इस दौरान 234.6 अंक पर 1.8 प्रतिशत की तीव्र बढोतरी हुई। ईंधन (ऊर्जा), प्रकाश एवं लुब्रीकेंट्स का सूचकांक फरनेंस तेल में दो प्रतिशत की बढोतरी से 0.1 प्रतिशत बढ़कर 341.4 अंक पर पहुंच गया। निर्मित उत्पादों के वर्ग का सूचकांक 0.2 प्रतिशत से बढ़कर 1अंक से 1अंक हो गया।ड्ढr प्राथमिक वस्तुआें के वर्ग में चना के तीन प्रतिशत, मसूर में दो, फल, सब्जियों, उड़द और मूंग में एक-एक प्रतिशत की तेजी आने से खाद्य वस्तुआें का सूचकांक 0.1 प्रतिशत बढ़कर 225.अंक से 226.2 अंक पर पहुंच गया। तिल और सरसों में पांच-पांच तथा अलसी के तीन प्रतिशत मंहगा होने से अखाद्य वस्तुआें के समूह का सूचकांक 0.4 प्रतिशत की वृद्धि से 226.3 अंक से 227.3 अंक पर पहुंच गया। परिवहन उपकरण एवं पुजर्ों के समूह का सूचकांक 171 अंक पर 0.2 प्रतिशत नीचे आया।ड्ढr ं

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