अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दुर्गा के प्रथम उपासक राजा सुरथ

मां दुर्गा की उपासना ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित कई देवताओं ने की। इनके साथ वेदव्यास, मार्कंडेय, जैमिनी नामक ऋषियों ने भी की, लेकिन दुर्गा की आराधना के अनन्य उपासक महाराज सुरथ एवं समाधी नामक वैश्य हैं। इन दो उपासकों की वृहद चर्चा दुर्गा सप्तशती एवं देवी भागवत में है। राजा सुरथ की सामरिक राजधानी कोल्हाचल नगरी है, जबकि राजा सुरथ को ज्ञान की प्राप्ति महर्षि सुमेधा के आश्रम में हुई। राजा सुरथ की राजधानी और सुमेधा ऋषि के आश्रम की दूरी देवी भागवत में 12 कोस है। यह स्थान पुराणों में महाराष्ट्र के कोलापुर एवं झारखंड में चतरा का कोल्हेश्वरी एवं भद्रकाली आश्रम बताया जाता है। आज भी राजा सुरथ की राजधानी कोल्हा पहाड़ एवं सुमेधा आश्रम की दरी 12 कोस की है। रजरप्पा को भी राजा सुरथ की तपोस्थली बताया जाता है।राजा सुरथ के संबंध में बताया जाता है कि सृष्टि के क्रम में 14 मन्वन्तरों के प्रसंग में सुरथ राजा जैसे देवी के प्रसाद से अष्टम मन्वन्तर के राजा हुए। यही कालांतर में सूर्य की सवर्णा नाम की स्त्री से उत्पन्न होकर अष्टम मनु नाम से विख्यात हुए। यही सुरथ द्वितीय मन्वन्तर में चैत्र नामक क्षत्रिय राजा हुए थे। इसलिए इन्हें चैत्र वंशीय राजा कहा गया। इसी जन्म में सुमेधा ऋषि से देवी की भक्ित का ज्ञान सुरथ को मिला। दुर्गा सप्तशती में इसी वंश के काल का वर्णन मिलता है। इस जन्म में राजा सुरथ ने भगवती दुर्गा को तपबल से संतुष्ट किया और जब भगवती साक्षात प्रकट हुईं तो राजा ने भावावेश में खड्ग से अपना हाथ पोछ कर राजसी तरीके से भगवती दुर्गा को प्रसन्न किया। दुर्गा ने राजा को सावर्णि मनु होने का आशीर्वाद दिया। राजा दुर्गा की कृपा से खोया राज्य गौरव प्राप्त किया और दूसरे जन्म में सूर्य की पत्नी सर्वणा के पुत्र सावर्णि हुए। मनु का अर्थ सृष्टि का पहला आदमी-आदम-हव्वा इभ से है। इस्लाम और ईसाई धर्म भी मनु अदम। इभ को स्वीकार करते हैं। राजा सप्तम मन्वन्तर में सूर्य और श्रया के पुत्र थे। समाधि वैश्य देवी की आशीर्वाद प्राप्त कर प्रतिष्ठित हो गये। पं रामदेव पांडेयड्ढr

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: दुर्गा के प्रथम उपासक राजा सुरथ