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ठेकेदार ही फर्जी तो क्या होगा काम

जब ठेकेदार ही नकली है तो असली काम कैसे होगा! कंकड़बाग ड्रेनेज योजना के तहत हो रहे नालों के निर्माण की यह तल्ख सच्चाई है। पुलिसिया अनुसंधान से भी इसकी पुष्टि हुई है। पुलिस अधिकारी उस समय चौंके जब पता चला कि पैकेज नंबर 0 और 12 के पेटी कांट्रैक्टर गबूधन सिंह, पंकज और नवीन कुमार फर्जी तरीके से काम करा रहे थे। इस मामले में तीन निर्माण कंपनियों की भूमिका भी शक के घेरे में आ गई है। गुरुवार को निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कंकड़बाग में छत्रपति शिवाजी पार्क के सामने नाले की ध्वस्त दीवार को देख कर एसएसपी को निर्माण कंपनियों के खिलाफ मिली शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने और आवश्यतानुसार आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया था।ड्ढr ड्ढr सदर डीएसपी विवेकानंद ने शनिवार को बताया कि पुलिस ने अपने बयान पर कंकड़बाग थाने में पैकेज व 10 से संबंधित मामला जबकि पैकेज 12 के बाबत पत्रकारनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। तकनीकी कमेटी भी छानबीन कर रही है। उसकी रिपोर्ट के आने के बाद पुलिस की अगली कार्रवाई तय होगी। इधर सूत्रों ने अनुसार ठेकेदारों नवीन और पंकज की तलाश में दबिश बढ़ाते हुए निर्माण से जुड़ी कुछ कंपनियों पर भी पुलिस पैनी नजर रख रही है। बेतिया का मूल निवासी और पेटी कांट्रैक्टर नवीन कुमार उषा कंस्ट्रक्शन कंपनी का काम करवा रहा था। कंकड़बाग थानाध्यक्ष रमाकांत प्रसाद के मुताबिक गबूधन और पंकज इस काम में ठेकेदार नहीं है। ये सभी थर्ड पार्टी हैं। सुनील कुमार एंड कंपनी और सतेन्द्र कुमार एंड कंपनी के नाम पर दोनों काम करवा रहे थे। ये दोनों कंपनी बेगूसराय की है। दूसरी तरफ सूत्रों ने बताया कि मोकामा निवासी गबूधन की गिनती दबंग ठेकेदारों में की जाती है। पुलिस एनबीसीसी के अधिकारियों व अन्य लोगों से भी पूछताछ कर रही है। इन ठेकेदारों द्वारा कराये जा रहे निर्माण कार्यो पर पहले ही रोक लगा दी गयी है। वैसे निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने भी माना था कि ड्रेनेज योजना के तहत निर्माणाधीन नालों में घटिया सामग्रियों का उपयोग हुआ है।ड्ढr ड्ढr ठेकेदार व एनबीसीसी अधिकारियों के बीच घंटों गुफ्तगूड्ढr पटना (का.सं.)। मुख्यमंत्री द्वारा कंकड़बाज ड्रेनेज योजना की गड़बड़ी पकड़े जाने और फिर तेजी से हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद ठेकेदारों से लेकर निर्माण एजेंसियों तक खलबली मच गई है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस के प्रकोप से बचने के लिए शनिवार को राजधानी के एक बड़े होटल में घंटों गुप्त बैठक हुई। इसमें रणनीति तय करने के लिए दिल्ली से पहुंचे एनबीसीसी के अधिकारियों के अलावा कुछ इंजीनियर व दो ठेकेदारों ने भाग लिया।ड्ढr बैठक में शामिल इंजीनियरों में दो ऐसे थे जो फिलहाल पुलिस के डर से अंडरग्राउंड है। दिलचस्प यह कि ये दोनों अपने दफ्तर में उपस्थिति भी बना रहे हैं लेकिन वहां अभी बैठते नहीं। सूत्रों ने बताया कि दिन भर बहस कानूनी कार्रवाई से बचने और निर्माण कार्य में गड़बड़ी आने पर केंद्रित रही। शहर में विभिन्न जगहों पर चल रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी चर्चा की गई। बीच-बीच में वहां पुलिस व प्रशासन की ताजा कार्रवाई की जानकारी भी पहुंच रही थी। दोपहर बाद आलाधिकारियों के काफिले के कंकड़बाग की ओर अचानक निरीक्षण के लिए पहुंचने की खबर मिलने के बाद बैठक में हलचल तेज हो गई। रात 8 बजे के बाद मीटिंग खत्म हुई और उसमें भाग ले रहे एनबीससी के इंजीनियर व अन्य अधिकारियों के साथ ही ठेकेदार भी विभिन्न वाहनों पर सवार होकर अलग-अलग रास्तों पर निकल गये।ं

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