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न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बने

यायमूर्ति शिवकीत्तर्ि सिंह पटना क्षईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बने। बुधवार को उन्होंने अपना कार्यभार ग्रहण किया। 13 नवम्बर 1ो जन्मे न्यायमूर्ति श्री सिंह ने पटना विश्वविद्यालय से एम ए तथा पटना लॉ कालेज से एल एल बी की डिग्री हासिल करने के बाद 17 मार्च 1ो पटना हाईकोर्ट से वकालत की शुरूआत की। सिविल, क्रिमिनल, संवैधानिक एवं सेवा संबंधी मामलों में महारथ हासिल करने पर उन्हें 17 जनवरी 10 को वरीय अधिवक्ता की उपाधि दी गई। अनेक वर्षो तक वे बिहार राज्य बिजली बोर्ड के रिटेनर भी रहे। 2दिसम्बर 1ो राष्ट्रपति ने उन्हें पटना हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया। पहली बार उन्हें कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है।ड्ढr ड्ढr मुख्य न्यायाधीश पद से न्यायमूर्ति जे बी कोशी के सेवा निवृत होने के कारण यह पद रिक्त हुआ है। न्यायमूर्ति श्री सिंह के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनने पर वरीय अधिवक्ता एवं बार काउसिंल ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष सूरा नारायण प्रसाद सिन्हा, बिहार राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष-सह- महाधिवक्ता पी के शाही, वरीय अधिवक्ता कृष्णा प्रसाद सिंह, पटना लॉ कॉलेज पूर्ववत्र्ती छात्र संघ के अध्यक्ष देवेन्द्र प्रसाद सिन्हा, राजकीय अधिवक्ता प्रभाकर टेकरीवाल, हरन्द्र प्रसाद सिंह तथा अवधेश कुमार पाण्डेय, सरकार के स्थायी सलाहकार अमरनाथ देव, सरकारी वकील गोपाल कृष्ण अग्रवाल, अधिवक्ता विंध्याचल सिंह, जितेन्द्र कुमार राय तथा अतुल कुमार पाण्डेय सहित अनेक वकीलों ने प्रसन्न्ता व्यक्त करते हुए बधाई दी। न्यायमूर्ति श्री सिंह ने इस संवाददाता को बताया कि वे सबकी अपेक्षाओं के अनुरुप यहां की कार्यसंस्कृति में बदलाव का प्रयास करंगे। दारोगा बहाली मामले में आज होगी सुनवाईड्ढr पटना (वि.सं.)। दारोगा बहाली मामले पर गुरुवार को पटना हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। बुधवार को महाधिवक्ता पी.के. शाही के नहीं रहने के कारण मामले की ओर से कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह तथा न्यायमूर्ति डा. रवि रंजन की खण्डपीठ को मामले की सुनवाई एक दिन केलिए टालने का अनुरोध किया गया। अदालत ने सरकार के अनुरोध को मंजूर करते हुए मामले की सुनवाई गुरुवार को करने का आदेश दिया। विदित है कि सरकार की ओर से निर्धारित दारोगा बहाली के सीट को बढ़ाए जाने को चुनौती दी गई है।ड्ढr ड्ढr इसके पहले न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी की एकलपीठ ने रिट याचिका को खारिज कर सरकार के फैसला को वैद्य करार दिया था। एकलपीठ के फैसला को एल.पी.ए. (अपील) दयार का चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट के तत्कालीन कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चन्द्रमौली कुमार प्रसाद की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ ने सरकार को सीट बढ़ाने सम्बन्धी सरकार के फैसला को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था। सरकार की ओर से सीट बढ़ाने की अधिसूचना हलफनामा के साथ दाखिल किया गया। जिसके एवज में आवेदकों की ओर से जवाबी हलफनामा दायर कर कहा गया है कि सरकार को सीट बढ़ाने का अधिकार नहीं है। सीट बढ़ाने के पहले राज्यपाल से मंजूरी लेना है लेकिन निर्धारित सीट से ज्यादा दारोगा बहाली मामले में राज्यपाल से अनुमति नहीं ली गई है।ं

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