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श्रीमद्भगवत गीता बांच रहे ब्रिटिश सैनिक

ब्रिटिश सेना के पहले हिंदू पुरोहित कृष्णा अत्री लड़ाई के मोर्चे पर इराक या अफगानिस्तान जा रहे ब्रिटिश सैनिकों को प्रसिद्ध भारतीय ग्रंथ ‘महाभारत’ के अंश सुना कर प्रेरित किया करते हैं। अत्री उन पहले चार पंथ पुरोहितों में से हैं, जिन्हें सेना द्वारा नवंबर 2005 में नियुक्त किया गया। अन्य तीन पंथ पुरोहितों में मनदीप कौर (सिख), सुनील कारियकरावना (बौद्ध) व इमाम असिम (इस्लाम)शामिल हैं। इंग्लैंड के सशस्त्र बलों में 300 नियमित कमीशंड ईसाई पुरोहित हैं, जिनका काम सेना के 183,000 ईसाई सैनिकों की धार्मिक गतिविधियों को धर्मसम्मत ढंग से पूरा कराना है। लेकिन इन चार पुरोहितों की नियुक्ित ब्रिटिश सेना के इतिहास में पहली बार की गई है। अत्री हिमाचल प्रदेश के कसौली के रहने वाले हैं। वह कहते हैं कि मैं इराक या अफगानिस्तान के मोर्चे पर जाने वाले ब्रिटिश हिंदू सैनिकों को युद्ध लड़ने की अनिवार्यता के बारे में समझाने के लिए ‘श्रीमद्भगवत गीता’ का उपयोग करता हूं। गौरतलब है कि ब्रिटिश सेना के 470 सैनिक हिंदू हैं। अत्री बताते हैं, ‘मैं उन्हें कहता हूं कि ईश्वर ने आपको अपने देश को बचाने का और दुनिया में शांति बनाए रखने का एक अवसर दिया है।’ अत्री के मुताबिक, सैनिकों को यह बताने की जरूरत होती है कि वे किसी की हत्या नहीं कर रहे वह सिर्फ अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं।’ जब अत्री ने नौकरी के लिए सैन्य मंत्रालय में इंटरव्यू दिया था, उनसे पूछा गया था कि वह किसी ऐसे सैनिक को क्या कहेंगे जो युद्ध में नहीं जाना चाहता हो। उस समय उन्होंने जवाब दिया था कि हिंदू शिक्षाआें में इस बारे में बेहतर निर्देश दिए गए हैं। ये शिक्षाएं हैं- कर्तव्य हमारी प्राथमिकता है। यह हमारा कर्म है और हमें इसको निभाना है। ये हिंदू शिक्षाएं अधिकतर सैनिकों को मजबूत बनाया है। अत्री वर्ष 1में 22 साल की उम्र में इंग्लैंड आए थे। उन्होंने करीब 20 सालों तक न्यूकैसल के एक हिंदू मंदिर में एक पुजारी के रूप में काम किया और हिंदू धर्मग्रंथों, संगीत व भारतीय भाषाआें की इंग्लैंड के हिंदू समुदाय को शिक्षा दी। फिलहाल वह अफगानिस्तान जाने वाले हैं, जहां ब्रिटिश सैनिक तैनात हैं।

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  • Web Title: श्रीमद्भगवत गीता बांच रहे ब्रिटिश सैनिक