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लंबी लड़ाई के बाद मिला झारखंड

अलग झारखंड राज्य के लिए आजसू के जनआंदोलन को अविवेकपूर्ण तरीके से कुचलने का प्रयास किया गया, लेकिन वीरों की इस धरती के सपूतों ने इस दमनात्मक कार्रवाई का दृढ़ता से मुकाबला किया और बड़ी कुर्बानियां दीं। उस समय आजसू के आंदोलनकारी गाया करते थे : सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में हैवक्त आने पर बता देंगे ए आसमां हम अभी से क्या बतायें, क्या हमारे दिल में है..ड्ढr आंदोलन को कुचलने के लिए जब-जब शासन ने सशस्त्र कार्रवाई की युवाआें का मनोबल बढ़ा और आंदोलन को गति मिली। लंबी लड़ाई एवं बलिदान के बाद जनता को अपना अलग राज्य भी मिल गया। एक बार फिर लोगों ने सुनहरे सपने देखे। लेकिन हमेशा की तरह जनता फिर ठगी गयी।ड्ढr ‘सिसकती संवेदनाएं, सिमटता सामाजिक सरोकार, सिकुड़ती ग्रामीण अर्थव्यवस्था, गांवों में पसरती राजनैतिक शून्यता, कराहती जनतांत्रिक व्यवस्था, लोक से कटता लोकतंत्र, हताश जनता, निराश किसान, बदहाल गरीब, असुरक्षित महिलाएं, बढ़ते अपराध, जनमानस में फैलती असुरक्षा की भावना, गैर जिम्मेदाराना राजनैतिक सोच, तिरोहित होते नैतिक एवं सामाजिक मूल्य आज झारखंड की सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक व्यवस्था’ को रेखांकित करते हैं। वर्ष 2000 में नये राज्य के रूप में झारखंड के सृजन के पश्चात विकास के मोरचे पर कुछ सकारात्मक पहल शुरू की गयी। आजसू के प्रतिनिधि के रूप में मुझे भी सरकार में शामिल होने का मौका मिला। मुझे पथ निर्माण विभाग की जवाबदेही सौंपी गयी। विरासत में मिली गड्ढों में तब्दील राज्य की सड़कों को सुधारने की दिशा में हमने ठोस कार्रवाई की। मात्र एक वर्ष की अवधि में जनता ने राज्य की सड़कों की स्थिति में हुए सुधार को महसूस करना एवं इसे सराहना शुरू कर दिया। राज्य में सड़कों की हालत तेजी से बदली तथा पूरे देश में झारखंड की सड़कों की स्थिति में हुए गुणात्मक सुधार के लिए सरकार के प्रयासों को सराहा गया। प्रारंभिक चरण में बदहाल सड़कों को सर्वप्रथम चलने योग्य बनाया गया। तदोपरांत राज्य के सड़कों के विस्तारीकरण की कई योजनाएं तैयार की गयीं तथा इसे क्रियान्वित किया गया। सभी जिला मुख्यालयों को राजधानी से जोड़नेवाली सड़कों के विस्तारीकरण की योजना पर कार्य प्रारंभ किया गया। विभिन्न हिस्से में सड़क यातायात को निर्बाध बनाने के लिए अनेक रेलवे आेवर ब्रिज का निर्माण कराया गया। इसी तरह तत्कालीन एनडीए सरकार के अन्य विभागों ने भी जनता के सपना एवं आकांक्षाआें के अनुसार कई योजनाएं प्रारंभ कीं। नयी राजधानी बसाने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जा चुकी थी। कुल मिला कर राज्य विकास के डगर पर अपना कदम मजबूती से आगे बढ़ रहा था। इसी बीच झारखंड को किसी की नजर लग गयी। झारखंड में विकास का रथ अपनी पटरी से उतर गया। राजनैतिक अनैतिकता की अंधी लहरों ने विकास की टहनियों को तोड़-मरोड़ कर रख दिया, छिन्न-भिन्न कर दिया। (जारी)ड्ढr (लेखक आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व गृहमंत्री हैं।)

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