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सूबे में हवा में ही रोपे गए पौधे !

सूबे में हवा में ही रोप दिये गये पौधे! इस अनोखे पौधरोपण पर करोड़ों रुपए खर्च हुए। वास्तविक जमीन 140 हेक्टेयर मगर कागजों पर 400 हेक्टेयर जमीन दिखा पौधे रोपे गये और 35 लाख रुपए उठा लिये गये। यही नहीं बिना पौधों की व्यवस्था किये ही पौधरोपण पर 1.08 करोड़ रुपए खर्च किये गये और उन्हें बाढ़ में बह गये बताया गया। सीएजी ने इस हैरतअंगेज पौधरोपण का खुलासा किया है।ड्ढr ड्ढr रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दरभंगा के डीएम ने भी कहा है कि उन्होंने अपने दौरे में पौधरोपण कहीं देखा ही नहीं। मुंगेर वन प्रमंडल के अन्तर्गत 14 भूखंडों पर वन भूमि के 400 हेक्टेयर में पुनर्वास कार्य का निष्पादन दिखाया गया। अंचल अधिकारी के अभिलेखों की जांच में पता चला कि 140 हेक्टेयर उपलब्ध भूमि के विरुद्ध 400 हेक्टेयर में पुनर्वास कार्य दिखाया गया। वन के धनत्व का न प्रमंडल और न ही उच्च अधिकारी द्वारा सर्वेक्षण किया गया। पौधों के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के पास नहीं भेजी गयी और 35.28 लाख रुपए का कपटपूर्ण भुगतान कर लिया गया। दरभंगा जिले में 23 पौधरोपण योजनाओं के तहत चार लाख ठूंठ जड़ों को स्थाई नर्सरियों में उगाना था और उन्हें 1थानों पर रोपना था। रिपोर्ट के मुताबिक ठूंठ जड़ों का विकासखरीद किये बिना पौधरोपण कार्य पर 53.11 लाख रुपए खर्च कर दिये गये और इन पौधों को वन प्रमंडल द्वारा बाढ़ में बह गया बताया गया। दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त द्वारा खर्च की मनाही के बावजूद बाढ़ के बाद मेन्टिनेंस पर 54.लाख रुपए खर्च कर दिये गये। सीएजी की रिपोर्ट ने कहा है कि इस प्रकार पौधरोपण के समर्थन में किसी प्रमाण के अभाव में 1.08 करोड़ रुपए का संदेहास्पद कपटपूर्ण भुगतान किया गया। ट्रांसफार्मर मरम्मत कारखाने से करोड़ों का तेल गायबड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। बिजली बोर्ड के ट्रांसफार्मर मरम्मत कारखाना (टीआरडब्ल्यू) से करोड़ों रुपए के तेल गायब होने का सनसनीखेज मामला भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने पकड़ा है। यही नहीं कारखाने से लाखों रुपए के कल-पुर्जे की गायब पाए गए। सीएजी ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर आपत्ति भी की है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि वर्ष 2002-03 से 2006-07 के बीच पांच वर्षो में बिजली बोर्ड के तीन टीआरडब्ल्यू पटना, गया और मुजफ्फरपुर में 22 लाख लीटर ट्रांसफार्मर तेल गायब पाए गए। इनकी कीमत 5.68 करोड़ रुपए आंकी गई है। विडम्बना यह है कि बिजली बोर्ड द्वारा तेल गायब होने की जांच भी नहीं की गई। पटना, गया व मुजफ्फरपुर टीआरडब्ल्यू में 2लाख लीटर तेल होना चाहिए था, लेकिन वहां महज 6.64 लाख लीटर तेल ही थे। इन कारखानों में 14 हजार से अधिक ट्रांसफार्मर खोले गए, लेकिन इनमें से 80 फीसदी ट्रांसफार्मरों का तेल गायब हो गए। बाद में बोर्ड को इनके लिए 25 हजार रुपए प्रति किलोलीटर की दर से तेल खरीदना पड़ा।ड्ढr ड्ढr रिपोर्ट बताती है कि पटना टीआरडब्ल्यू से सर्वाधिक तेल गायब हुआ जहां 13.लाख लीटर तेल की जगह महज 2.74 लाख लीटर तेल की वास्तविक प्राप्ति हुई। इसी तरह गया में 5.लाख लीटर की जगह 1.17 लाख लीटर और मुजफ्फरपुर में लाख लीटर की जगह 2.72 लाख लीटर तेल ही मिला। इसी तरह ट्रांसफार्मरों को मरम्मत के लिए भेजने के दौरान लाखों रुपए के पुर्जे गायब कर दिए गए और इसमें भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीएजी के अनुसार खराब होने के स्थल पर ही लंबे समय तक ट्रांसफार्मर को छोड़ देने की वजह से पुर्जे गायब हुए। इन तीन टीआरडब्ल्यू में 45 लाख रुपए से अधिक के पुर्जे गायब पाए गए।ं

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