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ढोंग थी इस्लाम को गले लगाने की बात : रश्दी

विवादास्पद लेखक सलमान रश्दी का कहना है कि तकरीबन 18 साल पहले ‘इस्लाम को गले लगाने’ की उनकी पहल दरअसल एक ‘दिखावा’ थी। भारतीय मूल के लेखक ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इससे उनकी जान को खतरा कुछ कम हो जाएगा। चैनल ‘मोर4’ के कार्यक्रम ‘श्रिंक रैप’ में एक भंेटवार्ता के दौरान रश्दी ने दावा किया कि जनमना धर्म की तरफ उनका झुकाव महज ढांेग था। यह कार्यक्रम अगले माह प्रसारित किया जाएगा। उन्होंने बताया, ‘यह घटिया सोच थी। मैं पहले से कहीं ज्यादा असंतुलित था, मगर आप उस दबाव का अनुभव नहीं कर सकते जो मुझ पर था। मैंने सोचा कि मैं एक दोस्ताना बयान दे रहा हूं। जैसे ही मैंने यह बात कही, मुझे लगा कि जैसे मेरी जबान फिसल गई थी।’ गौरतलब है कि वर्ष 10 में रश्दी ने अपने उपन्यास ‘द सेटेनिक वर्सेस’ पर उठी विरोध की लहर को हल्का करने के लिए एक बयान जारी किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि मुस्लिम धर्म मंे अपनी आस्था को वह नए सिरे से मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने इस्लाम पर हमले बंद कर दिए हैं और वह विश्वभर में इस धर्म की बेहतर समझ के लिए काम करने को प्रतिबद्ध हैं। भेंटवार्ता मंे लेखक ने कहा, ‘मुझे ऐसा लगा कि मेरे बचने का केवल एक तंत्र है और वो है मेरी निष्ठा। मेरे दोस्त मुझसे नाराज थे और यह वो प्रतिक्रिया थी, जिसने मुझे चिंता मंे डाला।’ मुंबई में पैदा हुए रश्दी ने खुद को कभी धार्मिक नहीं बताया।

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