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तम्बाकू के सेवन से ही मुंह का कैंसर

ैंसर रोग विशेषज्ञों का दो दिवसीय सम्मेलन ‘इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन हेड एण्ड नेक कैंसर एमसीएसकॉन-2008’ में विशेषज्ञों ने तम्बाकू छोड़कर मुंह एवं गले के कैंसर से बचने की अपील की। सभी इस बात पर एकमत थे कि तम्बाकू ही एक ऐसा पदार्थ है जिसके सेवन से मुंह, स्वरपेटी, आहार नली और गले का कैंसर होता है।ड्ढr सम्मेलन की सफलता का जिक्र करते हुए महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक डा.जितेन्द्र सिंह ने कहा कि बिहार में भारत की पहली अन्तर्राष्ट्रीय इकाई की नींव डाली गयी है जहां पर सभी प्रकार के मुंह और गले के कैंसर का सफल इलाज किया जाएगा। इस इकाई से न सिर्फ मरीजों का इलाज होगा बल्कि आरम्भिक अवस्था में मुंह एवं गले के कैंसर रोगियों की पहचान भी होगी।ड्ढr ड्ढr इस मौके पर इंडियन सोसायटी ऑफ हेड एण्ड नेक अंकोलॉजी के सचिव डा. रवि पी. देव ने बताया कि महावीर कैंसर संस्थान पूर्वी भारत का प्रमुख संस्थान बन चुका है। यहां पर हर साल 16 हजार नये कैंसर के मरीजों का इलाज किया जाता है। इसमें से सात हजार सिर्फ मुंह एवं गले के कैंसर रोगी शामिल हैं। इतनी अधिक संख्या में आनेवाले मरीजों का इलाज करना संस्थान के लिए चुनौती है। इसके लिए अधिक संख्या में प्रशिक्षित चिकित्सक और संसाधनों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुंह और गले का कैंसर रोग कम शिक्षित और गरीब तबके के लोगों में होता हैं। इनका इलाज लम्बे समय तक चलता है। जब तक मरीज इलाज के लिए चिकित्सक तक पहुंचते हैं तब तक काफी विलम्ब हो चुका होता है। सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों में डा. अलोक ठक्कर, डा. सुनील सैनी, डा.विक्रम संघवी, डा. नजुनंदप्पा, डा. रीता मुलहेरकर, डा. एस.एन. नैय्यर, डा. मनीषा सिंह, डा. पी.एम. पारिख, डा. जी.एस.भट्टाचार्या, डा. सफीक होसाल सहित 55 विशेषज्ञों का व्याख्यान हुआ।ड्ढr रासायनिक खाद के प्रयोग से भी सेहत पर प्रभाव : डा. महाजनड्ढr पटना (हि.प्र.)। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, लुधियाना के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. एम.के.महाजन ने बताया कि खेती में अधिक मात्रा में रासायनिक खादों के प्रयोग से सेहत पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थो से माइक्रोन्यूट्रिएंट की मात्रा समाप्त हो रही है। उत्तरी भारत में तम्बाकू सेवन से मुंह और गले के कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ रही है। मुंह और गले के कैंसर की जांच स्वयं की जा सकती है। इसके लिए मुंह को खोलना, ऊपर-नीचे के होठों में किसी प्रकार के छाले को देखना, जीभ को बाहर निकालकर देखना, दोनों तरफ के गले के अन्दर की जांच कर उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन होने पर जांच कराना चाहिए। आवाज में किसी तरह का बदलाव स्वर पेटी के कैंसर का आरम्भिक लक्षण हो सकता है।ड्ढr आधुनिक दवाओं से ठीक हो सकता कैंसर : डा. पारिखड्ढr पटना (हि.प्र.)। देश के प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. पी.एम. पारिख ने बताया कि आधुनिक दवाएं कैंसर रोग को ठीक करने में असरकारी हैं। उन्होंने कहा कि कीमोथिरेपी के साथ नई ‘सेलुक्सीमैब’ नामक नई दवा देने से एडवांस स्टेज के कैंसर रोगियों को भी लाभ मिल रहा है। इससे न सिर्फ कैंसर का नियंत्रण किया जा रहा है बल्कि गंभीर मरीजों को अधिक समय तक जीवन भी मिल रहा है। अब कैंसर की दवाएं दो हफ्ते के बाद भी दी जा रही हैं। पहले मरीजों को तीन हफ्ते पर दवाएं देनी पड़ती थीं जिससे अधिक समय होने पर उसके कीटाणुओं को तेजी से फैलने का मौका मिलता था। कम समय में दवा देने पर वह अधिक प्रभावी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रथम स्टेज में कैंसर रोगी का इलाज इन दवाओं के साथ चलाने से 80 फीसदी बीमारी ठीक हो जाती है। दूसरे स्टेज में 40 प्रतिशत बीमारी ठीक होने की संभावना रहती है।ड्ढr ड्ढr कैंसर से बचाव को अभियान चलाने की जरूरत : डा. भट्टाचार्यड्ढr पटना (हि.प्र.)। कोलकाता के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. जी.एस. भट्टाचार्य ने बताया है कि कैंसर की रोकथाम के लिए चौथे-आठवें वर्ग के छात्र-छात्राओं को जागरूक करने की आवश्यकता है। कैंसर की शिक्षा के लिए महिला स्कूल और कॉलेजों को लक्ष्य बनाकर अभियान चलाने की जरूरत है। यह पाया गया है कि घर में अभिभावक अपने पुत्र की तुलना में पुत्री की बातों को अधिक मानते हैं।ड्ढr उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को तम्बाकू और उसके उत्पादों से हर वर्ष 24 हजार करोड़ का राजस्व मिलता है जबकि कैंसर, दमा, हृदय रोग और लकवा जैसी चार बीमारियों के इलाज पर सरकार को हर वर्ष 28 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इन सब बीमारियों की जड़ में सिर्फ एक मात्र कारण तम्बाकू है। उन्होंने बताया कि बिहार में कैंसर मरीजों के लिए मुफ्त हेल्पलाइन की व्यवस्था की गयी है। एक सूचना केन्द्र भी स्थापित किया गया है जहां पर सभी प्रकार के कैंसर रोगियों को जानकारी दी जाती है।ं

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