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..तो दवा की भी जाति होती है बिहार में!

डाक्टरों की हैंडराइटिंग पढ़ना हमेशा से ही टेढ़ी खीर रहा है लेकिन हैरत की बात यह है कि बिहार के कई केमिस्ट डाक्टरों की टेढ़ी-मेढ़ी हैंडराइटिंग पढ़ने के साथ ही यह भी बता देते हैं कि डॉक्टर की जाति क्या है। यही हैरत एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार को हुई जो पटना में अपने पिता जी के लिए दवा लेने केमिस्ट के पास पंहुचे थे। रवीश ने जब इसका कारण जानना चाहा तो पता पड़ा कि एक खास कंपनी की दवाइयां एक खास जाति के डॉक्टर ही लिखते हैं।ड्ढr ड्ढr रवीश ने जब इसके आगे जानने की कोशिश की तो पता चला कि यह कोई राज नहीं है और इसे बिहार की पूरी मेडिकल बिरादरी ही नहीं, बाहर के लोग भी जानते हैं। यह भीमालूम हुआ कि राज्य में इस कंपनी के सारे कर्मचारी और मेडिकल रिप्रजेन्टेटिव भी उसी जाति के हैं और इनका मूल काम अपनी जाति के डॉक्टरों का नेटवर्क बनाना है। रवीश ने जब एक दूसरी जाति के डॉक्टर से पूछा कि क्या वे इस कंपनी की दवा लेने की सलाह मरीजों को देते हैं तो उनका जवाब था - कोशिश तो यही करते हैं कि इस कंपनी की दवा न ही लिखनी पड़े। रवीश कुमार ने यह सारी कहानी अपने ब्लॉग कस्बा ड्ड द्धrद्गथ्=द्धह्लह्लश्चज्ठ्ठड्डन्ह्यड्डस्र्ड्डद्म.ड्ढद्यoद्दह्यश्चoह्ल.ष्oद्वद्धह्लह्लश्चज्ठ्ठड्डन्ह्यड्डस्र्ड्डद्म.ड्ढद्यoद्दह्यश्चoह्ल.ष्oद्व पर दवा की जाति शीर्षक से लिख डाली तो एक के बाद एक प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं। बिहार के एक उत्साही युवक ने उस कंपनी का नाम तक लिख दिया। इसके बाद उसने टिप्पणी हटाने के लिए रवीश को फोन करने शुरू किए क्योंकि तब तक उसे जान से माने की धमकियां मिलनी शुरू हो गई थीं। अभी तक हैरत में पड़े रवीश इससे परेशान हो उठे। रवीश ने ‘हिंदुस्तान’ को बताया कि वह युवक बार- बार फोन करके कह रहा था कि वे लोग काफी प्रभावशाली हैं और उसे जीने नहीं देंगे। रवीश इस टिप्पणी को डिलीट करना चाहते थे लेकिन उनसे यह पूरी ब्लॉगपोस्ट ही डिलीट हो गई। हालांकि यह पोस्ट अभी भी मोहल्ला ड्ड द्धrद्गथ्=द्धह्लह्लश्चज्द्वoद्धड्डद्यद्यड्डद्धह्लह्लश्चज्द्वoद्धड्डद्यद्यड्ड. ड्ढद्यoद्दह्यश्चoह्ल.ष्oद्व पर मौजूद है।

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