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यह अपराध माफी लायक नहीं

अगर देश और राज्य के लोग फ्लोराइड और आर्सेनिक युक्त पानी पीकर विकलांगता और अपंगता की सौगात पा रहे हैं, तो यह सरकारों का अक्षम्य अपराध है। अनजाने में गलती हो तो माफी दी जा सकती है, लेकिन जानबूझकर की गयी गलती को कैसे नजरअंदाज करेंगे। यह कहना है प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और गांधी शांति प्रतिष्ठान, नयी दिल्ली के प्रधान सचिव अनुपम मिश्र का।ड्ढr रांची मंे एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आये श्री मिश्र ने ‘हिन्दुस्तान’ के साथ बातचीत में जल संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीति से भी ज्यादा गिरावट आयी है जलस्तर में। लोग राजनैतिक आजादी और भाषा के लिए भावुक हो जाते हैं, लेकिन जीवन के आधार (पानी) का महत्व नहीं समझते। झारखंड के दर्जनों प्रखंड (सिर्फ पलामू में 1100 टोले) के लोग हैंडपंप का फ्लोराइड और आर्सेनिकयुक्त पानी पी रहे हैं। यह सरकारों का ऐसा अपराध है, जिसे क्षमा नहीं किया जा सकता।ड्ढr उन्होंने कहा कि तालाब और कुएं फ्लोराइड नहीं देते। एक निश्चित गहराई के बाद नीचे जाने पर मिलते है फ्लोराइड, आर्सेनिक। इसके लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। हैंडपंप की जगह वर्षा के पानी का संचय कर ही इसका निदान संभव है। कुंआ रीचार्ज होगा तो तालाब से। श्री मिश्र ने कहा कि फ्लोराइड हटाने की तकनीक पूरे विश्व में कहीं भी सफल नहीं रही है। सरकार लाखों खर्च कर तकनीक आयात कर सकती है पर दो साल बाद फिर वही स्थिति होगी।ड्ढr

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