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गुरुजी को कैबिनेट में शामिल नहीं करने के मायने..

मतलब साफ है। कांग्रेस गुरुजी को अब दरकिनार करना चाहती है। छह अप्रैल को मनमोहन सिंह के कैबिनेट विस्तार में शिबू सोरेन को बर्थ नहीं मिलने का संकेत यही है कि आनेवाले दिनों में कांग्रेस झारखंड में अपने बूते चुनाव लड़ना चाहती है। झारखंड के पूर्व आइपीएस अधिकारी और लोहरदगा के सांसद डॉ रामेश्वर उरांव को मंत्रिमंडल में शामिल कर केंद्र ने झारखंड को अहमियत भी दी है।ड्ढr मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर गुरुजी प्रतिक्रिया देने से भी कतरा रहे हैं। सीधे तौर पर नाराजगी तो नहीं जता रहे, लेकिन प्रतिक्रिया के लिए फोन करनेवाले पत्रकारों को खूब खरी-खोटी सुना रहे हैं। कह रहे हैं-मुझे मंत्रिमंडल विस्तार की कोई जानकारी नहीं है और ना ही मैं मंत्री बनने के लिए लालायित हूं। गुरुजी चाहकर भी कांग्रेस के खिलाफ नहीं बोल पा रहे हैं, जबकि कांग्रेस गुरुजी को उनकी ‘हैसियत’ बताने का कोई मौका नहीं चूक रही। दरअसल गुरुजी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले ही उनकी सबसे बड़ी मुसीबत हैं।ड्ढr हाल में हुए राज्यसभा चुनाव का उदाहरण भी सामने है। झामुमो को राज्यसभा की एक सीट देने के बाद अंतिम समय में उसके प्रत्याशी किशोरलाल को कांग्रेस ने समर्थन नहीं दिया। सोरेन के प्रत्याशी की जगह आरके आनंद को समर्थन देकर कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया था कि उसकी राह गुरुजी से अलग है।ड्ढr गुरुजी को कैबिनेट में शामिल नहीं किये जाने पर झामुमो सांसद हेमलाल मुमरू से जब यह पूछा गया कि क्या झामुमो केंद्र में यूपीए सरकार को अब भी समर्थन देगा? तो उनका जवाब था कि झामुमो के समर्थन देने या न देने से कांग्रेस की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह जवाब एक तरह से झामुमो की पीड़ा बयां कर रहा है। जिस प्रकार प्रदेश में यूपीए के घटक दल झामुमो से अपनी दूरी बढ़ा रहे हैं, उससे आनेवाले चुनाव में प्रदेश में नये राजनीतिक समीकरण दिखेंगे-यह तय है।

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  • Web Title: गुरुजी को कैबिनेट में शामिल नहीं करने के मायने..