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अब बच्चा नहीं, झारखंड की बड़ी ताकत है आजसू

जनादेश रैली में कार्यकर्ताओं की लामबंदी ने आजसू की जमीनी पैठ दिखा दी है। भीड़ में दिखा गजब का जोश। एकदम नियंत्रित और संयमित। दिल्ली-पटना से न कोई नेता, ना ही कोई स्टार वक्ता। राजनीति की युवा ताकत का पर्याय आजसू ने रैली के बहाने दिल्ली-पटना से नियंत्रित राजनीतिक जमात और संगठन को सीधी चुनौती पेश की है। उत्साह, ऊर्जा और युवा ताकत झारखंड की राजनीति में एक विशिष्ट छाप छोड़ने में पूरी तरह सफल रही। राजनीति की देसज माटी की सोंधी खुशबू मोरहाबादी के मैदान से निकल कर पूरे राज्य में पसर गयी।ड्ढr स्थापित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के सूरमा भी अपनी उस ताकत का अहसास नहीं करा सके, जो आजसू के जवान नेतृत्व सुदेश महतो ने कर दिखाया। नेताओं ने प्रदेश की मौजूदा राजनीति में परिवर्तन का आगाज किया। अपने ही बूते अपनी ताकत दिखाने की इस कोशिश में चुनावी तैयारी का संकेत भी साफ तौर पर दिखा।ड्ढr राज्य के शहर-शहर, गांव- गिराव से खूब भीड़ जुटी। युवाओं के साथ किसान-मजदूर और पढ़े-लिखे लोगों ने भी रैली में शिरकत की। जोश में भिंचतीं मुट्ठियां नेताओं के आह्वान का साथ देने के लिए उठते हजारों हाथ। कई मायने में इस बार आजसू की रैली अलग थी। मोटरसाइकिल जुलूस का जोर, लेकिन उपद्रवी शोर नहीं। गाजे- बाजे का उत्साही शोर और नाचते- झूमते लोग। समय की कड़ी पाबंदी और मंच पर चढ़ने की आपाधापी नहीं। जगह पाने के लिए ठेलम-ठेला नहीं। जिसे जहां जगह मिली वहीं टिक गये। वकीलों, अफसरों, इंजीनियरों और शिक्षाविदों के आजसू के साथ जुड़ने से चेहरा बदला है। रैली में जबरदस्त भागीदारी के लिए कोई पैदल पहुंचा, तो कोई ट्रेन से और कोई साइकिल से।ड्ढr रामगढ़, सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से कार्यकर्ताओं का काफिला आया था, राज्य के दूसरे हिस्सों से भी उत्साहवर्धक भागीदारी हुई। यह आजसू के सांगठनिक विस्तार का प्रमाण दे रहा था। रैली में बड़े- बुजुर्गो और समाज के प्रतिष्ठित लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण थी। शिष्टाचार भी देखने को मिला और सबसे ऊपर राजनीतिक चुनौती स्वीकार करने की ललक। जनादेश रैली ने संकेत दिया कि आजसू की नजर सूबे की दूसरी विधानसभा सीटों पर भी है। हर सीट से एक- एक सुदेश को जीतायें यह कहते हुए सुदेश महतो ने कार्यकर्ताओं के उत्साह को दोगुना दिया। चंद्रप्रकाश चौधरी भी ताकत के रूप में सामने हुए हैं। पार्टी की अग्रिम पंक्ित के नेताओं में चंद्रप्रकाश चौधरी ने अपनी पकड़-पहुंच, प्रवीण प्रभाकर, देवशरण भगत, जोनाथन टुडू, कमल किशोर भगत सरीखे नेताओं ने अपने अनुभवों का भरपूर इस्तेमाल किया।ं

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