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किसान ऋण माफी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार की किसानों की साठ हजार करोड़ रुपये ऋण माफी योजना को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति आरवी रवीन्द्रन की पीठ से याचिककर्ता मनोहर लाल शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही रियायत का लाभ केवल भूमिहीन कृषकों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए, जिन्होंने बैंकों से ऋण लिया है न कि बड़े-बड़े जमींदारों को इसका लाभ दिया जाना चाहिए। इस पर उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि उनके पास किसानों के लाभ से संबंधित कोई और योजना है तो वह सरकार को उसका सुझाव दे सकते हैं। अंतत याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय से अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। गौरतलब है कि सरकार ने इस वर्ष के बजट में किसानों के राष्ट्रीयकृत बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं के साठ हजार करोड़ रुपये की ऋण माफी योजना पेश की थी। सरकार साहूकारों से लिए गए ऋणों का भुगतान भी अगले चार वष्रो में करेगी। यह प्रावधान केवल उन किसानों पर लागू होगा, जिनकी खेती की जमीन दो हेक्टेयर से कम है।ं

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  • Web Title: किसान ऋण माफी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज