DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फीस वृद्धि पर केंद्र को जल्दी नहीं

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के फीस वृद्धि के प्रस्ताव को ठुकराना सरकार के लिए मुश्किल प्क, हालांकि आईआईटी के भारी दबाव के वाबजूद सरकार इसे तर्कसंगत बनाने के पक्ष में है। आईआईटी कासिल ने छात्रों के मौजूदा 22 -26 हजार वार्षिक फीस को बढ़ा कर पचास हजार करने का प्रस्ताव किया है। संसद में इसे मुद्दा बनाये जाने से आशंकित सरकार फिलहाल इस पर मुहर लगाने की जल्दी में नहीं है। आईआईटी काऊंसिल ने फीस ढांचे में सुधार को उचित बताते हुए दलील दी है कि 1े बाद से आईआईटी केंद्रों ने फीस नहीं बढ़ाई है जिसके कारण आईआईटी प्रबंधन को राजस्व का भारी बोझ उठाना पड़ रहा है। आईआईटी दिल्ली केंद्र के निदेशक प्रोफेसर सुरेंद्र प्रसाद ने कहा कि आईआईटी प्रबंधन को प्रति छात्र लगभग दो लाख रुपये का खर्च वहन करना पड़ता है। मंत्रालय में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती डी. पुरंदेश्वरी ने ‘हिन्दुस्तान’ से खास बातचीत में सोमवार को बताया कि आईआईटी ने बीते दस सालों से छात्रों की फीस में कोई वृद्धि नहीं है लिहाजा आईआईटी काऊंसिल ने वित्तीय बोझ को कम करने के लिए मौजूदा फीस ढांचे में सुधार का प्रस्ताव किया है। यह पूछे जाने पर कि क्या सौ फीसदी वृद्धि के प्रस्ताव से सरकार सहमत है? श्रीमती पुरंदेश्वरी ने कहा कि इन्हीं मुद्दों पर विचार करने के लिए निदेशकों की बैठक अगले सप्ताह बुलाई गई है। पुरंदेश्वरी ने कहा कि मैं इतना भरोसा दे सकती हूं कि धन के अभाव में किसी भी छात्र को प्रौद्योगिकी शिक्षा से वंचित नहीं होने दिया जायेगा। आईआईटी के एक अधिकारी ने कहा कि फीस वद्धि के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिलने के बावजूद आईआईटी को प्रति छात्र पर डेढ़ लाख रुपये खर्च करना होगा । देश में दिल्ली , मुम्बई , चेन्नई , रुढ़की ,कानपुर , गुवाहाटी और खड़गपुर में आईआईटी के कुल सात केंद हैं। इन केंद्रों में प्रति वर्ष चार हजार छात्र दाखिला लेते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: फीस वृद्धि पर केंद्र को जल्दी नहीं